वसंतोत्सव की प्रथा---छ्वुन ल्येन यानी वसंतोत्सव के शुभ सूचक सुलेखन चिपकाना

2017-01-24 11:19:58

वसंतोत्सव की प्रथा---छ्वुन ल्येन यानी वसंतोत्सव के शुभ सूचक सुलेखन चिपकाना

छ्वुन ल्येन वसंतोत्सव के शुभ सूचक सुलेखन का दूसरा नाम है, वह मन द्वेई(द्वार पर दोहा), छ्वुन थ्येई( वसंती सज्जा), द्वेई ल्येन( दोहा), द्वेई ज़(जोड़ी) और थाओफ़ू(बुराई निवारण आड़ू लकड़ी) आदि नामों से भी संबोधित किया जाता है। वह चीन का विशेष साहित्यिक खजाना है, जो सुनियोजित, अलंकृत, सुबोधित व उपमेय शैली में युग का चित्रण करता है और सुन्दर अभिलाषा प्रतिबिंबित करता है। वसंतोत्सव के मौके पर शहरों और गांवों दोनों में त्योहार का खुशगवार माहौल बढ़ाने के लिए घर घर में लाल कागज पर लिखित छ्वुन ल्येन लगाये जाते हैं। यह प्रथा चीन के सुंग राजकाल से शुरू होकर मिंग राजकाल में खूब प्रचलित हो गयी। छिंग राजवंश में छ्वुन ल्येन की विचारात्मक व कलात्मक गुणवत्ता में काफ़ी उन्नति हुई।

छ्वुन ल्येन की विविध किस्में होती हैं जो मन शिन, ख्वांग द्वेई, हंग फी, छ्वुन थ्याओ और दो फ़ांग आदि विभिन्न स्थलों पर चिपकाये जाते हैं।“मन शिन”वाला छ्वुन ल्येन दरवाज़े के ऊपरी भाग के केंद्र में चिपकाया जाता है,“ख्वांग द्वेई”वाला द्वार के दोनों चौखटों पर चिपकाया जाता है,“हंग फी”वाला दरवाजे के ऊपरी चौखट के धरन पर चिपकाया जाता है,“छ्वुन थ्याओ”विभिन्न विषयों के अनुसार तदनुरूप स्थलों में चिपकाया जाता है, “ दो फ़ांग”का दूसरा नाम है“मन फ़ांग”, जो हीरे के आकार में है और आम तौर पर फ़र्निचरों और सामने वाले दीवारों पर चिपकाये जाते हैं।


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