शो स्विई

2017-01-24 11:22:21

शो स्विई

शो स्विई यानी नये साल की पूर्वरात्रि पर देर रात तक जागना।शो स्विई का दूसरा नाम है“आओ न्येन”। इस प्रथा के अनुसार चीनी लोग पुराने साल की अंतिम रात में नहीं सोते हैं और जागते हुए नये साल का इंतज़ार करते हैं। चीनी लोग इसे“आओ ये”भी कहते हैं। इस प्रथा के बारे में एक दिलचस्प कहानी प्रचलित है।

आदि काल में एक खुंख्वार राक्षस था, जो घने जंगल में रहता था। लोग उसे“न्येन”कहते थे। उस का रूप डरावना था और स्वाभाव में क्रूर था जो विशेष तौर पर पक्षियों व जानवरों को खाना पसंद करता था। उस का स्वाद रोज बदलता था, शुरू शुरू में कीट खाने से अंत में मनुष्य का मांस चखाने तक आ पहुंचा था। हालत यहां तक आ गयी थी कि लोगों के चेहरे का रंग“न्येन”का नाम सुनते ही सफेद पड़ जाता था। लेकिन बाद में लोगों ने धीरे धीरे“न्येन”की गतिविधियों का नियम जान पाया। यानिकि“न्येन”हर 365 दिनों में एक बार मनुष्य की बस्ती जाकर आदमखोर करता था। इतना ही नहीं,“न्येन”आम तौर पर अंधेरे के बाद बाहर आता था और भोर फटते ही जंगल में वापस लौटता था।

 “न्येन”के आने जाने का नियम जानने के बाद लोग इस डरावनी रात को“न्येन क्वेन”यानी न्येन से बचाने का नाजुक वक्त समझते थे और इस रात को सही सलामत गुजारने के लिए तरह तरह के तरीकों की खोज की। हर बार जब वह रात आयी, तो रात्रि भोजन की तैयारी करने के बाद सभी परिवार चूल्हे की आग बुझा कर स्टोव को साफ़ करते थे, मुर्गों के दरबों व भेड़ों के बाड़ाओं को मजबूत बन्द करते थे, आंगन के आगे पीछे के द्वारों को बंद करके कमरे में छिपकर वर्ष का अंतिम रात्रि भोज खाते थे। चूंकि इस रात्रि भोज के बाद सभी चीजें अनिश्चित बन सकती थीं, इसलिए भोज बहुत प्रचुर व स्वादिष्ट बनाया जाता था। पारिवारिक मिलन के रूप में बड़े व छोटे मिलकर खाना खाते थे। शांतिपूर्ण रूप से इस रात्रि को गुजारने के लिए खाने से पहले लोग पूर्वजों से पनाह की प्रार्थना भी करते थे। रात्रि भोज के बाद कोई भी शख्स नहीं सो पाता था। लोग एक साथ बैठे हुए गपशप करते थे। लोग मोमबत्ती या तेल के दीपे जला करके पूरी रात्रि में जागते रहते थे। यह इस का द्योतक है कि सभी बुराइयों और महामारियों को भगाया जाएगा और नये साल में शुभमंगल उपलब्ध होगा। यह प्रथा अभी तक प्रचलित रही है।


कैलेंडर

न्यूज़ व्यापार पर्यटन बाल-महिला स्पेशल विश्व का आईना चीनी भाषा सीखें वीडियो फोटो गैलरी