लोक मेला

2017-02-06 11:22:52

लोक मेला

य्वानश्याओ उत्सव के अवसर पर चीन की जगह जगह में लोक मेला का आयोजन किया जाता है। चीन में मेला एक किस्म की सामाजिक गतिविधि है, जिस की शुरूआत प्राचीन जमाने में भू-देवता की पूजा अनुष्ठान से हुई थी, उपरांत में धीरे-धीरे लोगों के बीच सामान की अदला-बदली और सांस्कृतिक आयोजन का स्थल बन गया।

आम तौर पर त्योहार उत्सव व निर्धारित दिनों में मंदिर के भीतर या मंदिर के आसपास के खाली स्थान पर मेला आयोजित किया जाता है, कुछ स्थानों में मेले का आयोजन सिर्फ़ वसंतोत्सव के वक्त किया जाता है। यद्यपि भिन्न-भिन्न स्थानों में अलग-अलग समय के अनुसार मेले का आयोजन होता है, तथापि जिनके मुख्य विषयों में ज्यादा फ़र्क नहीं है। मेले के दौरान किसान व व्यापारी अपने कृषि उत्पाद और स्थानीय विशेषता वाली उपजें तथा दूसरे स्थानों से प्राप्त पुरातन वस्तुएं, फूल, पक्षी, मछली व कीट पतंग आदि लाकर सौदा करते हैं। विभिन्न कारीगर और लोक कलाकार अपने द्वारा बनी हुई कलात्मक वस्तुएं बेचते हैं या नृत्य गान प्रदर्शित करते हैं। लोग मेले में खुशी के साथ खरीदारी व बिक्री करते हैं, अभिनय का मज़ा लेते हैं और स्वादिष्ट पकवान खाते हैं, मेले का माहौल सचमुच बहुत रौनक और उत्साहित होता है।

वर्तमान पेइचिंग में हर वर्ष वसंतोत्सव के दौरान मेला आयोजित किया जाता है, जिनमें श्वेत बादल मंदिर का मेला, तिथान मंदिर का मेला, लोंगथानहू झील का मेला और लोंगफू मंदिर का मेला ज्यादा मशहूर है। पेइचिंग के मेले में परम्परागत रीति रिवाज़ सुरक्षित है, जैसा कि श्वेत बादल मंदिल के मेले में गधे पर सवार होकर घूमना, कांस्य सिक्के के बीच के छेद में सिक्के फेंकना आदि। मेले में बेचने वाली वस्तुएं उत्तर चीन की विशेषता लिए हुई होती है, जैसा कि बांस चक्की क्रीड़ा , पवनचक्की, चाकू, भाला, तलवार और परशु के खिलौने आदि, इसके साथ ही मेले में स्टिक पर शक्कर लेपित फल और मीठा कोदों का मांड़ जैसे पकवान लोगों की पसंदीदा खाना है।


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