छिंग मींग के रीति-रिवाज

2017-04-03 20:09:19

छिंग मींग के रीति-रिवाज

छिंग मींग उत्सव के रीति-रिवाज प्रचुर व दिलचस्प है। आग का निषेध  और पूर्वजों की समाधि पर श्रद्धांजलि के अलावा लोग उपनगरी मैदान में सैर सपाटा करने, झूला झूलने, छू च्यु ( फ़ुटबॉल) खेलने, पोलो खेलने और विलो के पेड़ रोपने आदि की गतिविधियों का आयोजन भी करते थे। कहा जाता है कि छिंग मींग उत्सव में ठंडा व्यंजन खाना अनिवार्य था। ठंडे व्यंजन खाने से शारीरिक स्वास्थ्य को क्षति पहुंचने से बचाने के लिए लोग कुछ खेल-व्यायाम करने के विकल्प अपनाते थे। इसलिए छिंग मींग उत्सव एक विशेष त्योहार है, जिसमें मृतकों के कब्रों पर आहुति चढ़ाने और बुहारी करने की दुखक भावना शामिल है, साथ ही सैर-सपाटा जैसा मनोरंजन करने की सुखद भावना भी प्रकट है। 

                                                    झूला झूलना

वह प्राचीन चीन में छिंग मींग उत्सव में प्रचलित रीति-रिवाज था। छ्योछ्येन (झूला) का अर्थ है चमड़े की रस्सी पकड़कर हिलना झूलना। इस का पुराना इतिहास था। सब से पहले इस का नाम था छ्येनछ्यो। बाद में परहेज के लिए छ्येनछ्यो का नाम बदलकर छ्योछ्येन रखा गया। प्राचीन काल में छ्योछ्येन (हिंडोरा) को पेड़ की मोटी टहनी पर बांध दिया जाता था, फिर इस पर रंगीन रस्सी बांधी जाती थी, इस प्रकार एक झूला बन जाता था। कालांतर में विकसित होकर एक स्तंभ पर दो रस्सी बांध कर और एक पेडल लगाने से झूला बनाया जाता है। झूला झूलना न केवल स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है, बल्कि साहस बढ़ाने का काम भी आता है। आज भी यह खेल लोगों, खास तौर पर बालकों में बहुत लोकप्रिय है।

                                                           छू च्यु

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