क्या भारत को एक पट्टी एक मार्ग में भाग लेना चाहिए?

2017-05-08 19:27:34

क्या भारत को एक पट्टी एक मार्ग में भाग लेना चाहिए?

भारत स्थित चीनी दूतावास के मिनिस्टर ल्यूचिनसुंग ने भारतीय ऑबजर्वर रिसर्च फाउंडेशन के निमंत्रण पर मुम्बई में आयोजित एक पट्टी एक मार्ग संबंधी एक संगोष्ठी में भाषण दिया। मौके पर ल्यूचिनसुंग ने कहा कि 14 से 15 मई को चीन की राजधानी पेइचिंग में एक पट्टी एक मार्ग अंतर्राष्ट्रीय सहयोग मंच का आयोजन किया जाएगा। तब वहां पर चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग मंच की अध्यक्षता करेंगे। 28 देशों के नेता और संयुक्त राष्ट्र महासचिव मंच पर भी उपस्थित होंगे। 110 देशों के विभिन्न तबकों के सूत्रों और 61 अंतर्राष्ट्रीय संगठन मंच पर भाग लेंगे। वर्तमान मंच की थीम है सहयोग और समान उदार। हाल के दिनों में भारतीय मीडिया, विद्वानों और थिंकटैंक ने एक पट्टी एक मार्ग पर ध्यान दिया और विविधतापूर्ण राय भी पेश की। उनकी चर्चा का केंद्र विषय ये था कि क्या भारत को एक पट्टी एक मार्ग में भाग लेना चाहिए? भारत को एक पट्टी एक मार्ग से लाभ मिलेगा या नहीं? 

भारतीय लोगों के इन संदेहों की चर्चा में ल्यू चिनसुंग ने अपने विचार प्रकट किये। उन्होंने छह क्षेत्रों पर प्रकाश डाला। 

पहला, ऐतिहासिक संस्कृति के दृष्ठकोण से देखा जाए तो भारत हमेशा ही रेशम मार्ग पर स्थित रहा है। प्राचीन समय के महा भिक्षु ह्वेनत्सांग चीन के छांग आन से प्रस्थान करके चीन के शिनच्यांग, मध्य एशिया, अफगानिस्तान, कश्मीर को पार कर नालंदा विश्वविद्यालय पहुंचे। उन्होंने भारत में करीब 17 सालों तक पढ़ाई की और पूरे भारत की यात्रा की। चीन वापस लौटने के बाद उन्होंने《थांग राजवंश में पश्चिम की तीर्थयात्रा》नाम की पुस्तक लिखी, जिसमें तत्कालीन भारत के उपमहाद्वीप के बीसीयों राज्यों के रीति-रिवाज़ों और धार्मिक वातावरण का विवरण था। 

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