चीन की तीन मशहूर गुफ़ाएं

2017-07-03 09:00:26

लगभग ईसापूर्व पहली शताब्दी में बौद्ध धर्म प्राचीन भारत से चीन में आया। दक्षिणी व उत्तरी राज्य काल शुरू होने के बाद शासकों ने बौद्ध धर्म का प्रचार-प्रसार करने के लिए कुछ स्थानों की पहाड़ी चट्टानों पर गुफ़ाएं खुदवायीं। स्वेई व थांग राजवंशों के काल में गुफ़ा कला में बड़ा विकास हुआ था। उस समय शान शी प्रांत के ता थुंग की युन गांग गुफ़ा, ह नान प्रांत के ल्वो यांग की लुंग मन गुफ़ा एवं गान सू प्रांत के त्वुन ह्वांग की मो गाओ गुफ़ा सब से प्रसिद्ध थीं। उपरोक्त तीन गुफ़ा समूहों में सभी सब से बड़ी गुफ़ाएं इसी काल में खोदी गयी थीं। ये गुफ़ाएं प्रचुर व विविध रंगीन बौद्ध धर्म के भित्ति चित्रों एवं बौद्ध प्रतिमाओं की मौजूदगी के चलते विश्वविख्यात थीं, जो कला निधि का खजाना माना जाता है।

चीन की तीन मशहूर गुफ़ाएं

शान शी प्रांत की युन गांग गुफ़ा उत्तरी वेई राज्य की बौद्ध कला में सब से नामी थी। वह पहाड़ पर खड़ी चट्टानों पर खुदवायी गयी, पूरा गुफा समूह चट्टानों पर 1000 मीटर लम्बाई पर पंक्तिबद्ध था। गुफ़ाओं में हज़ारों बड़ी व छोटी बौद्ध प्रतिमाएं विराजमान थीं, जिन में से सब से बड़ी बौद्ध प्रतिमा की ऊंचाई 17 मीटर तक पहुंची थी।

चीन की तीन मशहूर गुफ़ाएं

लुंग मन गुफ़ा में सब से बड़ी गुफ़ा थांग राजवंश में निर्मित की गयी थी, जिस में बौद्ध प्रस्तर प्रतिमाओं की मानव आकृति, भाव-हाव व वेशभूषा में भारत एवं मध्य एशिया की कला विशेषता का प्रभाव झलकता था, पर और सजीव व ओजस्वी लगती थी। इस से थांग राजवंश में लोगों के सौंदर्य बौध की विशेषता प्रतिबिंबित हुई थी।

कैलेंडर

न्यूज़ व्यापार पर्यटन बाल-महिला स्पेशल विश्व का आईना चीनी भाषा सीखें वीडियो फोटो गैलरी