चोंग साम और पारंपरिक चीनी वेश-भूषण

2017-10-12 11:52:02

चोंग साम और पारंपरिक चीनी वेश-भूषण

चोंग साम की उत्पत्ति छिंग राजवंश में मानचू जाति के महिला वस्त्रों से हुई और चीनी पारंपरिक परिधान संस्कृति का आदर्श मॉडल माना जाता रहा है। वह समग्र स्टाइल में चीनी संस्कृति की मेल एकता की विशेषता के अनुरूप ही नहीं, साथ ही उस की आभूषण तकनीक में भी पूर्व की खास विशिष्टता की झलक मिलती है। इस के अलावा चोंग साम नारी को सुडौल व छरहरा दिखाने में सहायक भी होता है, ऊंची एड़ी वाले जूते के साथ नारी के दैहिक भार का केन्द्र ऊंचा उठा सकता है जिस से पूर्व की स्त्रियों की सुशीलता, भद्रता और शिष्टता की छवि दृष्टिगोचर होती है। अतएव चोंग साम चीनी परिधान में अतूल्य पहचान बनाकर लम्बे अरसे से लोकप्रिय रहा है।

चोंग साम और पारंपरिक चीनी वेश-भूषण

चीन के परंपरागत पुरूष पोशाकों में लम्बा चोगा और मानचुरिन जाकेट प्रतीकात्मक है, दोनों मानचु जाति के पोशाक है। उन का कालर गोलाकार और बांह संकरी है। मानचुरिन जाकेट के बटन वस्त्र के अग्र आंचल पर ऊपर से नीचे तक बीचोंबीच टंकते है और अधिकांश जाकेटों की बांहें अश्वखुर नुमा हैं, जबकि लम्बा चोगा बगल के दाईं पक्ष में टांके बटन से खोला जाता है। मानचुरिन जाकेट और चोगा को बीच में जोड़ कर पहनने का तरीका भी मिलता है, इस प्रकार के पहनाव में चोगे का सिर्फ निचला आधा भाग होता है और उसे कमर में जाकेट के निचले आंचल के साथ जोड़ा जाता है। लम्बा चोगा और मानचुरिन जाकेट पहनने में सभ्यता और सादगी और सहजता का अहसास देता है और सुविधापूर्ण भी होता है।

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