चीन-भारत संबंधों को आगे बढ़ाने का अहम एक्सेलरेटर है आर्थिक, व्यापारिक सहयोग

2018-05-16 10:33:04

2014 के बाद चीन-भारत आर्थिक संबंधों का लगातार तेज़ विकास हुआ है। 2017 में चीन-भारत द्विपक्षीय व्यापारिक राशि 84.4 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंची, जो 2016 की तुलना में 20.3 प्रतिशत की बढ़ी है, जो इतिहास में एक नया रिकॉर्ड है। चीन भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदारी रहा है। खास तौर पर भारत से चीन के निर्यात में करीब 40 प्रतिशत की वृद्धि आयी, जिससे द्विपक्षीय व्यापार और संतुलित हो गया। बुनियादी संरचनाओं के सहयोग में भारी प्रगति मिली है। 2017 के अंत तक भारत में चीन का पूंजी निवेश 8 अरब अमेरिकी डॉलर से ज्यादा रहा। आर्थिक, व्यापारिक सहयोग चीन-भारत संबंधों का एक्सेलरेटर बन चुका है।

भारत स्थित चीनी दूतावास के आर्थिक वाणिज्य काउंसिलर ली पेईच्वन ने पत्रकारों से कहा कि हाल में उद्यान क्षेत्र, स्मार्ट निर्माण, चिकित्सा-स्वास्थ्य और इंटरनेट उद्योग चीन-भारत सहयोग के अहम क्षेत्र हैं। हालिया चीन-भारत अहम आर्थिक-व्यापारिक सहयोग की प्रमुख विशेषताएं हैं“तेज़, स्थिर, नयी और जीवित”हैं। 2014 के मई माह से भारत में चीन के पूंजी निवेश में 200 प्रतिशत की वृद्धि आयी है। परम्परागत उद्योग क्षेत्र में चीन के ल्यूगुंग ग्रुप और सानयी चोंगगुंग आदि निर्माण उद्यम, मेदी और हेयर आदि घरेलू उपकरण कंपनियों को भारत में बड़ा विकास हुआ है।

भारत में चीन के नवोदित उद्योग का भी बड़ा विकास हुआ। 2018 की पहली तिमाही में भारतीय स्मार्ट फ़ोन बाज़ार में चीनी मोबाइल फ़ोन का अनुपात 57 प्रतिशत तक बढ़ा है। चीनी इंटरनेट उद्यम भी पेटीएम, जोमातो और हाइक आदि भारतीय इंटरनेट स्टार उद्यमों में प्रवेश कर चुके हैं। इसके अलावा अलीबाबा और टेन्सेंट ने भी क्रमशः शेयर खरीदने के तरीके से भारतीय ई वाणिज्य उद्योग् में शामिल हुए हैं। आज सीधे पूंजी निवेश के सिवाए, शेयर खरीदने, विलय और अधिग्रहण, औद्योगिक निधि और अन्य निवेश तरीके चीनी पूंजी निवेश के नये फ़ार्मूले बन चुके हैं।

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