भारतीय विद्वानः चीन और भारत के बीच संपर्क का अच्छा माध्यम स्थापित हो चुका है

2018-08-29 09:03:01

भारतीय विद्वानः चीन और भारत के बीच संपर्क का अच्छा माध्यम स्थापित हो चुका है

हालिया चीन-भारत संबंध के विकास के बारे में 29 जुलाई को शांगहाई अंतर्राष्ट्रीय मामले की अनुसंधान संस्था और इंटोनेशियाई रणनीति और अंतर्राष्ट्रीय सवाल के अनुसंधान केंद्र द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित दूसरे एशिया-प्रशांत क्षेत्रीय सुरक्षा के अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में भारत के नेहरू विश्वविद्यालय के प्रोफेसर श्रिकन्थ कोनदपली ने चीनी मीडिया के साथ साक्षात्कार में कहा कि हालांकि चीन और भारत के बीच अभी भी मतभेद मौजूद हैं, फिर भी दोनों को और विस्तृत वैश्विक व क्षेत्रीय दृष्टिकोण से एक दूसरे के संबंधों को देखना चाहिए और शांतिपूर्ण माहौल पर जोर देना चाहिए।

श्रिकन्थ ने कहा कि उन की नजर में डोकलाम टकराव से चीन और भारत के नेताओं के बीच वार्ता की गयी। दोनों ने वार्ता के तरीके से द्विपक्षीय तनावपूर्ण परिस्थिति में शैथिल्य लाया है। द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत बनाने के लिए अब भारत चाहता है कि चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग अगले साल भारत जाकर मोदी के साथ अनौपचारिक वार्ता भी कर सकेंगे, जैसा कि इस साल वुहान में हुई थी। श्रिकन्थ ने कहा कि पिछले 60 सालों में चीन और भारत के बीच सीमांत समस्या का हल नहीं किया गया। हर साल दोनों देश इस पर विचार विमर्श करेंगे, लेकिन कोई परिणाम प्राप्त नहीं किया गया। दोनों देशों को एक दूसरे की समझ को प्रगाढ़ करके समस्या का हल करने के लिए समय चाहिए। सीमांत समस्या के सिवाए, चीन के दृष्टिकोण से दलाई लामा पर मतभेद भी दोनों देशों के बीच मौजूद एक मुश्किल सवाल है। जबकि भारत ने चीन की आलोचना की कि चीन ने पाकिस्तान की आतंकवादी कार्यवाई की नजरअंदाज दी है। लेकिन डोकलाम टकराव के बाद दोनों देशों के नेताओं ने द्विपक्षीय संपर्क पर सहमतियां प्राप्त की हैं। दो बड़े देश और दो नवोदित आर्थिक समुदाय होने के नाते दोनों देशों की सरकारों ने द्विपक्षीय वार्ता को मजबूत करने का निर्णय लिया है।

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