“इलेक्ट्रॉनिक व्यक्ति युग” में कैसे बच्चों को घास मैदान में लाएं

2018-10-10 10:51:01

चाहे आप मानें या न मानें हम स्वेच्छा से“इलेक्ट्रॉनिक व्यक्ति युग”में प्रवेश कर चुके हैं। मानव जाति के जीवन में सूचना प्रौद्योगिकी का दिन ब दिन व्यापक इस्तेमाल किया जाने लगा है। इस बात में कोई आश्चर्य नहीं कि लोगों के जीवन और काम करने की स्थिति ज्यादा से ज्यादा ऑनलाइन में परिवर्तित की जाने लगी। ऑनलाइन पढ़ाई, ऑनलाइन गेम्स, ऑनलाइन मनोरंजन इत्यादि। लेकिन व्यस्कों और बालकों पर“इलेक्ट्रॉनिक व्यक्ति युग”का कुप्रभाव लोगों ने पता लगाया है।

ब्रिटेन आदि पश्चिमी देश बच्चों को आभासी दुनिया से घास के मैदान में खींचने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि बच्चे“इलेक्ट्रॉनिक व्यक्ति युग”से लायी विविधतापूर्ण समस्याओं के प्रभाव से बच सकें।

ज्यादा से ज्यादा चीनी मां-बाप को यह महसूस हुआ कि आज के युग में बच्चे दिन रात आभासी दुनिया में व्यस्त रहते हैं और नये इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों से खेलते हैं। वे आभासी दुनिया से खुशी की खोज करने की कोशिश करते हैं। हम बचपन में खेती मैदानों में आराम से दौड़ते थे और खेलते थे। तो हमारे बच्चे कब हमारी जैसी खुशियां महसूस कर सकते हैं! 

अमेरिकी विद्वान रिचर्ड लुफ ने अपनी एक पुस्तक में प्रकृति अभाव रोग की विचारधारा पेश की। उन्होंने कहा कि प्रकृति अभाव रोग डॉक्टरों द्वारा उपचार करने वाला रोग नहीं है, जबकि वह हालिया एक खतरनाक स्थिति है। यानी बच्चे प्रकृति के साथ कम समय बिताते हैं, जिस से उनके व्यवहार और मनोवैज्ञानिक समस्याएं पैदा हुई हैं। प्रकृति अभाव से पैदा होने के मुख्य कारण हैः मां-बाप बच्चों के बाहर खेलने की बात को नहीं मानते। बच्चों के लिए खेलने के स्थलों की कटौती और इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों की दिन ब दिन लोकप्रियता है।

20 शताब्दी के 70 के दशक में ब्रिटिश विद्वान लुकास ने“पर्यावरण संबंधी शिक्षा, पर्यावरण के जरिए शिक्षा और पर्यावरण के लिए शिक्षा”के पर्यावरण शिक्षा फार्मूले को प्रस्तुत किया। लुकास फार्मूले से प्रभावित होकर ब्रिटिश पर्यावरण शिक्षा जगत ने आउटडोर शिक्षा की लहर छेड़ी। लोगों ने सुझाव पेश किया कि किसी भी क्लास और किसी भी कॉर्स के विद्यार्थी ओपन मैदान में जाकर पढ़ें, ताकि विद्यार्थी आउटडोर पढ़ाई से सब से अच्छा परिणाम पा सकें। 

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