सुधार व खुलेपन की नीति लागू होने के बाद श्याओकांग गांव में आया भारी परिवर्तन

2018-11-22 10:02:00

सुधार व खुलेपन की नीति लागू होने के बाद श्याओकांग गांव में आया भारी परिवर्तन

40 साल पहले चीन में ग्रामीण सुधार मध्य चीन के आनह्वेई प्रांत की फंग यांग काउंटी की श्याओकांग गांव से शुरू हुआ, जिस ने चीन में सुधार व खुलेपन की प्रक्रिया पर गहरा असर डाला।

इस साल फसल का साल है। चीन के आनह्वेई प्रांत की फंग यांग काउंटी की श्याओकांग गांव की खेती भूमि में धान की सुगंध फैल रही है। 55 वर्षीय छंग शीपिन श्याओकांग गांव यहां तक फंग यांग काउंटी में मशहूर धान उगाने वाले किसान हैं। इधर के सालों में उन्होंने क्रमशः किसानों से 30 से ज्यादा हेक्टेयर की खेती भूमि किराये पर ली। लेकिन साल ब साल बढ़ने वाले खर्च से छंग शीपिन को दबाव का अहसास हुआ। उन के मुताबिक,“हमारे बीच अनुबंध के मुताबिक हरेक हेक्टेयर की खेती भूमि के लिए मुझे 12000 युआन देना होता है, लेकिन यदि प्राकृतिक आपदा आए, तो हरेक हेक्टेयर खेती भूमि के लिए मुझे करीब 1.5 लाख चीनी युआन खत्म हो जाएंगे। इसलिए खेती भूमि को किराये पर लाने का जोखिम होता है।”

सुधार व खुलेपन की नीति लागू होने के बाद श्याओकांग गांव में आया भारी परिवर्तन

40 साल पहले श्याओकांग गांव के 18 किसानों ने खेती भूमि को किराये पर लाने के अनुबंध पर हस्ताक्षर किये, जिस ने चीन में ग्रामीण सुधार शुरू किया। किसान येन ने कहा,“हम श्याओकांग गांव के सुधार करने वाले लोग हैं। 1978 में जब चीन में सुधार व खुलेपन की नीति लागू शुरू हुई, तो हमें अहसास हुआ कि एक रात के बाद ही हमारे खाने-पीने की समस्या पूरा हुई है।”

श्याओकांग गांव में सुधार की नीति लागू होने के पिछले 40 सालों में परम्परागत कृषि अभी भी अहम रहा। लेकिन लोगों के विचारों में भारी परिवर्तन आए हैं। गांव के युवा देश के अन्य स्थल जाकर पढ़ने या नौकरी करने लगे। वापस लौटने के बाद उन्होंने गांव में नवाचार की विचारधारा लाये हैं और आधुनिक कृषि का विकास करने में मदद देते हैं।

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