मोबाइल के गुलाम बने लोग

2018-12-13 10:02:00

मोबाइल के गुलाम बने लोग

सुबह उठने के तुरंत बाद मोबाइल फोन को देखते हैं। सोने से पहले अंतिम बात मोबाइल फोन देखते हैं। मैट्रो, बसों या हवाई अड्डों के प्रतीक्षा कक्षों में अधिकांश लोग सिर झुकाकर मोबाइल फोन देखते हैं।

आज के समाज में कुछ लोग मोबाइल फोन से अपहृत किये गये हैं। यहां तक कि वे मोबाइल गुलाम भी बन चुके हैं। मोबाइल फोन के साथ लोगों का संबंध ज्यादा से ज्यादा घनिष्ट होने लगा है, जबकि इस घनिष्ट संबंध में खतरा भी छिपा हुआ है।

कुछ लोग पैदल चलते समय भी मोबाइल फोन देखते हैं और आसपास की गाड़ियों को नजरअंदाज करते हैं, जिस से अनेक यातायात दुर्घटनाएं घटित हुईं। आंकड़े बताते हैं कि 2016 में अमेरिका में करीब 6000 पैदल यात्री मारे गये थे, जो पिछले 20 सालों में सब से अधिक रिकॉर्ड है। अध्ययन के मुताबिक मोबाइल फोन आदि इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के इस्तेमाल से पैदल यात्रियों और ड्राइवरों की लापरवाही से पैदल यात्रियों की मौत संख्या में बढ़ने का मुख्य कारण ही है।

 अनेक युवा भी मोबाइल के गुलाम बन चुके हैं। दक्षिण कोरिया की एक जांच के मुताबिक दक्षिण कोरिया में 15 प्रतिशत के युवा इंटरनेट और मोबाइल फोन के प्रयोग में लगे रहते हैं। और उन की छोटी उम्र होने की प्रवृत्ति है।

मोबाइल खेलने में लगे होने की वजह से शरीर में समस्याएं आ सकेंगी। मोबाइल गुलामों की समस्या का हल करने के लिए अनेक देशों ने विविधतापूर्ण कदम उठाये हैं।

औस्ट्रिया ने फ़ुटपाथ के स्ट्रीट लाइट के लैंप पोस्ट पर गैसबैग लगाया, ताकि चलते समय मोबाइल फोन का इस्तेमाल करने वाले लोग लैंप पोस्ट से झटका लगने से बच सकें। गैसबैग पर लोगों को सावधानी से पैदल चलने की चेतावनी भी दी गयी है।

ब्रिटेन की एक कंपनी ने एलईडी लैंप को ज़ेबरा क्रॉसिंग की किसी भी ओर में लगाया। एक बार कोई व्यक्ति ज़बेरा क्रॉसिंग पर चलता है, तो सफ़ेद एलईडी लैंप तुरंत लाल रंग में बदलेगा, जो ड्राइवरों को गाड़ी रोकने की चेतावनी देता है।

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