एक दूसरे को समझने की नयी खिड़की खोलेगी हिन्दी भाषा

2019-04-23 06:08:00

एक दूसरे को समझने की नयी खिड़की खोलेगी हिन्दी भाषा

हिन्दी भाषा भारत में सबसे प्रचलित भाषा है। लम्बे अरसे से हिन्दी कई चीनियों के लिए बिलकुल अपरिचित है। लेकिन दिन ब दिन खुलने वाले चीन में आजकल ज्यादा से ज्यादा चीनी छात्र हिन्दी भाषा सीखने लगे हैं। आज के प्रोग्राम में मैं आप लोगों को शांगहाई विदेशी भाषा विश्वविद्यालय के प्रोफेसर नवीन चंद्र लोहनी और उन द्वारा संपादित पत्रिका “समन्वय हिन्ची” के बारे में जानकारी दूंगी।

प्रोफेसर लोहनी के लिए गौरव की बात है कि कुछ चीनी शिक्षकों और चीन में भारतीयों की सक्रिय भागीदारी और समर्थन से हाल में उनके संपादन में हिन्दी भाषा की नयी पत्रिका “समन्वय हिन्ची” का प्रकाशन किया गया। यह भी पूर्वी चीन में पहली हिन्दी भाषा की पत्रिका है।

लोहनी ने बताया कि शांगहाई में दो साल से रहने के दौरान मेरे मन में एक विचार पैदा हुआ। भारत-चीन मैत्री न सिर्फ भारत के विकास के लिए जरूरी है, बल्कि पूरे पूर्वी एशिया और दक्षिण एशिया के विकास के लिए भी जरूरी है। हाल में भारत-चीन आदान प्रदान व सहयोग दिन ब दिन घनिष्ट होता रहा है। शिक्षा जगत की हालिया फौरी बात है कि ज्ञान और सूचना को सरल भाषा में एक दूसरे को देना है, ताकि दोनों देशों की जनता पीढ़ी दर पीढ़ी मेल से रह सके। हिन्दी भाषा चीन और भारत द्वारा एक दूसरे को जानने की नयी खिड़की बनेगी।

हम पत्रिका “समन्वय हिन्ची” से यह देखा जा सकता है। चीनी विद्यार्थियों ने हिन्दी में अपने अपने जन्मस्थान के बारे में जानकारी दी। चीनी शिक्षकों ने संबंधित चीनी उपन्यासों को चीनी से हिन्दी में अनुवाद किया। यांग्त्सी नदी के डेल्टा में रहने वाले भारतीय लोगों ने हिन्दी में भारतीय विशेष योग और जातीय नृत्य कला का प्रसार किया। साथ ही उन्होंने लेख लिखकर चीन में बुलेट ट्रेन में सवारी करने और चीन के दर्शनीय स्थलों की यात्रा करने का अनुभव बताया। कुछ भारतीय लेखकों ने कन्फ्यूशियस, चीनी खेल और चीनी महिलाओं के स्थान आदि विषयों को अपने लेख का मुख्य विषय बनाया। कुछ भारतीय लेखकों ने चीनी कविताओं को हिन्दी में अनुवाद कर परिचय किया। शांगहाई स्थित भारतीय जनरल काउंसलर अनिल कुमार राय ने कहा कि इस पत्रिका में विविध चीन-भारत सांस्कृतिक आदान प्रदान और आर्थिक व व्यापारिक संबंधों के कई हजारों का इतिहास प्रतिबिंबित होता है। दोनों देशों के लोगों ने हिन्दी भाषा के माध्यम से संपर्क व आवाजाही की, जिससे भारत के प्रति चीन का ध्यान प्रतिबिंबित है। साथ ही पत्रिका से हम भी देख सकते हैं कि चीन में काम करने या रहने वाले भारतीय लोग सक्रिय रूप से चीन के विकास की धारा में शामिल हुए हैं।

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