विश्व जनसंख्या दिवसः 8 साल बाज जनसंख्या के मामले में भारत बन जाएगा शंहशाह, इन बड़ी समस्याओं से होगा सामना

2019-07-26 09:12:00

11 जुलाई को विश्व जनसंख्या दिवस था। करीब 30 साल पहले 1989 में संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम की गवनिंग काउंसिल द्वारा इसकी शुरूआत की गयी थी। 11 जुलाई 1987 को विश्व की जनसंख्या 500 करोड़ तक पहुंच गयी थी। वैश्विक जनसंख्या मुद्दों के जरिए जागरूकता बढ़ाने के प्रयासों के तहत इसे शुरू किया गया।

जिसमें परिवार नियोजन, लिंग समानता, गरीबी, मातृ स्वास्थ्य और मानव अधिकारों का महत्व शामिल किए गए थे। संयुक्त राष्ट्र रिसर्च में बताया गया था कि अगर लोगों की आबादी इसी तरह बढ़ती रही तो जल्द ही वैश्विक स्तर पर इसका आंकड़ा 10 अरब के आसपास पहुंच जाएगा।

बता दें कि वर्तमान में दुनिया की कुल आबादी 7.7 अरब तक पार कर गई है। जिसमें दुनिया की कुल आबादी का आधे से भी बड़ा हिस्सा केवल एशिया महाद्वीप में ही रहता है। पहली बार ऐसा हुआ है कि जब 65 साल से अधिक उम्र के लोगों की आबादी पांच साल के बच्चों की आबादी से ज्यादा अधिक पाई गयी है। इससे पहले साल 1900 के पहले तक दुनिया की सब से बड़ी समस्या शिशु मृत्यु दर था जिसकी वजह से जन्मे बच्चों में से एक चौथाई ही जिंदा बच पाते थे।

इसके अलावा उस समय भी लोगों की औसत आयु 30 साल ही बतायी गयी थी। लेकिन चिकित्सा विज्ञान के प्रगति ने इन सभी आंकड़ों को बदलकर रख दिया है। इस समय भारत में विकासशील देश भी आज के समय में मेडिकल टूरिज्म के क्षेत्र में तेज़ी से आगे बढ़ता दिख रहा हैं।

विकसित देशों में इलाज की लागत को बढ़ते देख पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल, भूटान, म्यांमार, मालदीव समेत दुनिया के की देशों से लोग मेडिकल टूर्ज्म के लिए भारत आ रहे आते हैं। 1951 में भारत की आबादी 36 करोड़ तक पहुंच गयी थी जो आज के समय में बढ़कर 133 करोड़ हो गयी है। कई रिपोर्टर्स में दावा किया गया है कि जनसंख्या के मामले में भारत आने वाले साल 2027 तक चीन को पीछे छोड़ चुका होगा।

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