50 साल पहले आज ही चांद पर इंसान ने रखा था पहला कदम, यहां जानें मिशन की अनसुनी बातें

2019-08-07 09:06:00

21 जुलाई ,1969, 50 साल पहले की वो तारीख, जब इंसान ने चांद पर पहला कदम रखकर इतिहास तो रचा ही था, साथ ही भविष्य में सुदूर अंतरिक्ष तक अपनी पहुंच की संभावनाओं के दरवाजे भी खोल दिये थे। 16 जुलाई 1969 को अपोलो-11 की लॉंचिंग हुई। 21 जुलाई को 2 बजकर 56 मिनट पर अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री नील आर्मस्ट्रांग ने चांद पर पहले कदम रखे थे।

वह अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के अपोलो 11 मिशन के तहत चांद पर गए थे। उनके साथ बज आल्ड्रिन और माइक कॉलिंस भी इस मिशन पर गए थे। लेकिन क्या आप को पता है कि इस मिशन की नींव 1961 में ही पड़ गई थी।

1961में पहली बार अंतरिक्ष में गया था इंसान

1961 में पहली बार इंसान अंतरिक्ष में गया था। तत्कालीन सोवियत संघ (अब रूस) के अंतरिक्ष यात्री यूरी गगारिन ने यह उपलब्धि हासिल की थी। वह सोवियत संघ की ओर से लांच किए गए वोस्टोक अंतरिक्ष यान में बैठकर पृत्वी की कक्षा में गए थे और सकुशल धरती पर वापस आए थे। सोवियत संघ की इस कामयाबी के बाद तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति ज़न एफ केनेडी ने बड़ी घोषणा कर दी। उन्होंने ऐलान किया कि अमेरिका अगले 10 साल के अंदर चांद पर इंसान को पहुंचाएगा और उसे वहां से सकुशल वापस लाएगा।

1 दशक की मेहनत के बाद मिली सफलता

तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति जॉन एफ केनेडी द्वारा घोषित किए गए चांद पर मानव मिशन के बाद उसे मूर्तरूप देने के लिए नासा पूरी टीम के साथ जुट गई। नासा ने करीब एक दशक तक चांद पर मानव को उतारने के लिए कड़ी मेहनत की। इस दौरान करीब 5 लाख वैज्ञानिकों ने इसमें अपना योगदान दिया। नासा की ओर से 24 घंटे तक कड़ी मेहनत की गई।

लूनर मॉड्यूल बनाने में लगे 6 साल

नासा को चांद पर इंसान को भेजने और वहां से उसे सकुशल पृथ्वी पर वापस लाने के लिए एक बेहद शक्तिशाली और मजबूत अंतरिक्ष यान व रॉकेट बनाना था। इसके लिए नासा ने करीब 6 साल तक कड़ी महनत करके लूनर मॉड्यूल तैयार किया। इसे नाम दिया गया ईगल। यह लूनर मॉड्यूल चांद की कक्षा में रॉकेट के जरिए पहुंचने के बाद चांद की सतह पर लैंड होना था।

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