आकश में दफनाना : पारंपरिक तिब्बती अंतिम संस्कार विधि

2017-09-24 23:48:00

आकश में दफनाना एक पारंपरिक तिब्बती अंतिम संस्कार विधि है, जिसमें गिद्धों को मृत शरीर खिलाये जाने के लिए पहाड़ की चोटी पर खुले में छोड़ दिया जाता है। चीन के कई प्रांतों और तिब्बती स्वायत्त क्षेत्रों में यह अनुठा अंतिम संस्कार किया जाता है। दक्षिणी पश्चिम चीन में सछ्वान प्रांत के कांजी तिब्बती स्वायत्त क्षेत्र के सेता काउंटी में यह अनुठा अंतिम संस्कार विधि देखने को मिला।

इस क्रिया में पहले मृत शरीर को शमशान ले कर जाते है, जो कि एक ऊंचाई वाले इलाके में होता है। वहा पर लामा धुप बत्ती जलाकर उस मृत शरीर कि पूजा करता है, फिर एक शमशान कर्मचारी मृत शरीर से विधिपूर्वक कपड़ों को उतारता है, और शवों को विकृत करता है। बाद में गिद्धों को बुलाया जाता है।

यह परम्परा तिब्बती समुदाय में हज़ारों सालों से चली आ रही है। इस परम्परा के अस्तित्व में आने के दो प्रमुख कारण है एक तो तिब्बती क्षेत्र इतनी ऊचाई पर स्थित है कि यहां पर पेड़ नहीं पाये जाते है इसलिए यहां पर जलाने के लिए लकड़ियों का सर्वथा अभाव है। और दूसरी बात कि तिब्बती क्षेत्र की जमीन बहुत पथरीली है उसे 2–3 सेंटी मीटर भी नहीं खोदा जा सकता इसलिए वहां पर शवों को दफनाया भी नहीं जा सकता।

तिब्बती क्षेत्र में अधिकतर लोग व्रजयान बौद्ध धर्म को मानते है जिसमें आत्मा के आवागमन कि बात कि जाती है। जिसके अनुसार शरीर से आत्मा के निकलने के बाद वो एक खाली बर्तन रह जाता है, उसे सहज के रखने कि कोई जरुरत नहीं है, इसलिए वे लोग इसे आकाश में दफ़न कर देते है।

(अखिल पाराशर)

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