चीन के सुधार और खुलेपन का प्रतिबिंब- अखिल पाराशर

2018-03-05 21:13:05

आज से 40 साल पहले दिसंबर में, चीन के महान नेता तंग श्याओफिंग ने एक ऐतिहासिक भाषण दिया था, वो यह था कि "मन को सशक्त बनाएं, तथ्यों से सच्चाई लें और एकजुट होकर भविष्य का सामना करें।" इस विचार ने चार दशक के सुधार और खुलेपन को जन्म दिया, जिससे चीन दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया। मेरा मानना है कि अगले दशक में, चीन दुनिया के उन कुछ देशों के सूचि में शामिल हो जाएगा, जो द्वितीय विश्व युद्ध के बाद कम आय वाले से उच्च आय वाले की स्थिति में परिवर्तित हो जाएगा।

5 मार्च को चीनी प्रधानमंत्री ली खछ्यांग ने 13वीं चीनी राष्ट्रीय जन प्रतिनिधि सभा के पहले पूर्णाधिवेशन में अपनी सरकारी कार्य रिपोर्ट सुनाने के दौरान साफ कहा कि हम व्यापक रूप से सुधार को गहन करेंगे, और खुलेपन पर कायम रहेंगे। चीन खुलेपन की बुनियादी नीति पर कायम है। सप्लाई क्षेत्र में ढांचागत सुधार को प्राथमिकता देते हुए स्थिर वृद्धि, सुधार की मज़बूती, ढांचे में परिवर्तन, जन जीवन को लाभ पहुंचाने और जोखिम विरोधी आदि कार्य को आगे बढ़ाये जाने की बात कही। खास कर महत्वपूर्ण जोखिमों को रोकथाम करने, गरीबी उन्मुलन, प्रदूषण विरोधी आदि क्षेत्रों में मज़बूत प्रगति प्राप्त की जाए, जन जीवन में सुधार को मज़बूत किया जाए, और आर्थिक सामाजिक सतत स्वस्थ विकास को आगे बढ़ाया जाए।”

आज के दौर में, चीन दुनिया के बाकी हिस्सों के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि अधिकाधिक देशों को अनुकरण करने के लिए चीन एक उदाहरण बन गया है। अक्टूबर 2017 में चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के 19वी राष्ट्रीय कांग्रेस में, चीन ने सुधार और खुलेपन की शुरुआत के बाद पहली बार इस बदलाव को स्वीकार किया।

कुछ मायनों में, चीन के सुधार काफी मुख्यधारा थे। देश ने व्यापार और विदेशी निवेश के दरवाजे खोले, कीमतों को उदार बनाये, स्वामित्व को मुक़्तलिफ़ किया, संपत्ति के अधिकार को मजबूत बनाया, मुद्रास्फीति को नियंत्रण में रखा और उच्च बचत और निवेश बरकरार रखा।

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