टिप्पणी: चीन के अस्वीकृत अमेरिकी सोयाबीन को नहीं खा सकता यूरोप

2018-07-29 17:50:00

वहीं प्रधानमंत्री सांचेज़ ने यूरोपीय संघ की समान कृषि नीति की रक्षा करने को कहा। उनका कहना है कि स्पेन एकतरफ़ावाद में विश्वास नहीं करता है और न ही किसी भी विशेष आर्थिक समुदाय द्वारा अंतरराष्ट्रीय व्यापार में खुद की नीति और मापदंड को दूसरों के सिर पर जबरन डालने का विश्वास करता है।

आखिरकार कृषि मामले पर यूरोप और अमेरिका के रूख में इतना बड़ा फर्क मौजूद क्यों है?

यह सर्वमान्य है कि कृषि अटलांटिक महासागर के दोनों तटों के बीच व्यापार का संवेदनशील क्षेत्र है। दोनों पक्ष खुद के कृषि उत्पादन की रक्षा करने में प्रयासरत हैं। यूरोपीय संघ के आंकड़ों के अनुसार, यूरोपीय संघ हर साल कृषि को 59 अरब यूरो (68 अरब अमेरिकी डॉलर के बराबर) का भत्ता देता है। इसी क्षेत्र में अमेरिका कम नहीं रहा। पत्रिका“द इकॉनोमिस्ट”ने आर्थिक सहयोग और विकास संगठन (ओईसीडी) के आंकड़ों के हवाले से कहा कि साल 2016 में अमेरिकी सरकार ने किसानों को विभिन्न प्रकार का 33 अरब अमेरिकी डॉलर की सब्सिडी दी।

वास्तव में अमेरिका और यूरोप के बीच कृषि मुद्दे पर मौजूद विरोधाभासी मत 3 सालों तक जारी रही टीटीआईपी वार्ता विफल होने के मुख्य कारणों में से एक है। यूरोप ने“भौगोलिक संकेत”पेश किया, जिसका लक्ष्य मिलते-जुलते ब्रांड वाले अमेरिकी उत्पादों के यूरोपीय संघ के बाज़ार में प्रवेश होने से रोकना है। अमेरिका ने इसका दृढ़ विरोध किया है। इसके साथ ही यूरोप ने अमेरिका के ट्रांसजेनिक उत्पादों के प्रवेश को भी अस्वीकार किया।

ब्रुसेल्स की चिंता है कि यूरोप का प्राचीन पारिवारिक कार्यशाला रूप वाला कृषि प्रचालन नमूना अमेरिका के समूहिक आधुनिक प्रबंधन के साथ संघर्ष करने में असमर्थ होगा।

हालांकि यूरोपीय संघ के कुछ प्रमुख देशों के नेताओं ने कृषि को ट्रम्प द्वारा प्रस्तुत“तीन शून्य”व्यापार वार्ता में शामिल करने से इनकार किया, लेकिन यूरोपीय संघ फिर भी वचन का पालन करना जारी रखेगा।

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