टिप्पणीः जीडीपी का 60 प्रतिशत अमेरिका द्वारा बनायी गयी प्रतिद्विंदी के लिए एक लाल रेखा है

2018-08-10 19:48:58

टिप्पणीः जीडीपी का 60 प्रतिशत अमेरिका द्वारा बनायी गयी प्रतिद्विंदी के लिए एक लाल रेखा है

इस हफ्ते में अमेरिका और चीन ने क्रमशः 23 अगस्त से एक दूसरे के 16 अरब यूएस डॉलर मूल्य वाले उत्पादों पर 25 टैरिफ़ बढ़ाने की घोषणा की। देखने में इस बार अमेरिका द्वारा चीन के खिलाफ़ टैरिफ़ बढ़ाने का मकसद दोनों देशों के बीच अन्यायपूर्ण व्यापार को हल करना है, लेकिन इसका गहरा मकसद है कि अमेरिका को तेज़ पुनरुत्थान करने वाले प्रतिद्विंदी पर हमला करना है, ताकि अमेरिकी डॉलर के नायकत्व की रक्षा कर सबसे बड़ा आर्थिक लाभांश पाया जा सके।

हालांकि अमेरिका का इतिहास सिर्फ 200 वर्ष का है, फिर भी प्रतिद्विंदी पर नियंत्रण करने के उपाय अमेरिका के पास ज्यादा हैं। पिछली शताब्दी में सोवियत यूनियन का जीडीपी एक बार अमेरिका के 60 प्रतिशत से ज्यादा पहुंचा, तो अमेरिका ने सोवियत यूनियन के खिलाफ प्रतिबंध लगा दिया। साथ ही सोवियत यूनियन ने खुद ही गलती की, जिसके फलस्वरूप इसका विभाजन हुआ। जापान की जीडीपी ने भी एक बार अमेरिका के 60 प्रतिशत को पार किया था, जिससे अमेरिका ने सतर्कता बरती और जापान पर चॉक समझौते पर हस्ताक्षर करने का दबाव डाला। इसके बाद जापान बीस सालों के लिए आर्थिक मंदी में फंसा रहा।

इन सबसे हम देख सकते हैं कि अमेरिका के लिए उसके जीडीपी की 60 प्रतिशत एक लाल रेखा है। जब भी कोई देश इस रेखा को पार करता है तो अमेरिका इसे रोकने के लिए हरसंभव कोशिश करता है। 2014 में चीन के जीडीपी ने पहली बार अमेरिका के जीडीपी के 60 प्रतिशत को पार किया था। अमेरिका के दृष्टिकोण से देखा जाए तो चीन के आर्थिक विकास की गति और निहित शक्ति पहले के प्रतिद्विंदियों से और तेज़ है। और भविष्य में चीन के जीडीपी के अमेरिका के जीडीपी को पार करने की बड़ी संभावना भी है। इसी पृष्ठभूमि में चीन पर दबाव डालना अमेरिका के लिए जरूरी बात है। 2017 के अगस्त माह में अमेरिका ने औपचारिक रूप से चीन के खिलाफ 301 जांच शुरू की और कई रिपोर्टों में चीन पर प्रतिद्विंता का आरोप थोप दिया।

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