टिप्पणीः पूर्वोत्तर एशियाई आर्थिक सर्कल की रचना करने में प्रेरणा शक्ति डालता है चीन

2018-09-13 11:04:01

टिप्पणीः पूर्वोत्तर एशियाई आर्थिक सर्कल की रचना करने में प्रेरणा शक्ति डालता है चीन

चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने 12 सितंबर को चौथे पूर्वी आर्थिक मंच में भाषण देकर नयी परिस्थिति में क्षेत्रीय शांति, स्थिरता, विकास और समृद्धि के लिए चार सुझाव पेश किये। यानी सब को आपसी विश्वास को मजबूत करना चाहिए, सहयोग को गहरा करना चाहिए, एक दूसरे से सीखना चाहिए और भविष्य के उन्मुख काम करना चाहिए।

पूर्वोत्तर एशियाई क्षेत्र में चीन, रूस, मंगोलिया, दक्षिण कोरिया, डीपीआरके और जापान छह देश शामिल हैं, जिनकी कुल आबादी विश्व की 23 प्रतिशत और जीडीपी विश्व का 19 प्रतिशत है। 2015 में पूर्वी आर्थिक मंच की स्थापना हुई, जिस ने पूर्वोत्तर एशियाई क्षेत्र के सहयोग के लिए नया प्लेटफार्म तैयार किया है। हाल में पूर्वोत्तर एशिया विश्व में सब से बड़ी निहित शक्ति होने और तेज़ आर्थिक विकास होने वाले क्षेत्रों में से एक बन चुका है। लेकिन एकतरफावाद और संरक्षणवाद से पूर्वोत्तर क्षेत्र के गहरे सहयोग में बाहरी बाधा पहुंची है। इस परिस्थिति में क्षेत्रीय सहमति प्राप्त कर खुले क्षेत्रीय आर्थिक विकास करना और जन-जीवन के लाभांश को उन्नत करना इस क्षेत्र के विभिन्न देशों की समान अपील बन चुकी है।

चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने अपने भाषण में पूर्वोत्तर एशियाई आर्थिक सर्कल की रचना करने का समान लक्ष्य पेश किया। नयी परिस्थिति में विभिन्न पक्ष कैसे सहयोग गहरा कर सकते हैं? चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने रणनीतियों को जोड़ने, सीमापार बुनियादी संरचनाओं के आपसी संपर्क को उन्नत करने, व्यापार और निवेश के स्वतंत्रीकरण और सुविधाकरण के स्तर को बढ़ाने, छोटे बहुपक्षीय सहयोग और उपक्षेत्रीय सहयोग को आगे बढ़ाने आदि सुझाव पेश किये। इन सुझावों का यथार्थ अर्थ है। हाल में चीन-रूस-मंगोलिया आर्थिक गलियारे के निर्माण में प्रारंभिक प्रगतियां मिली हैं। चीन-जापान-दक्षिण कोरिया मुक्त व्यापार क्षेत्र की वार्ता चल रही है। इन सब ने क्षेत्रीय अनवरत विकास को आगे बढ़ाया है और भविष्य के सहयोग को और गहरा करने के लिए सीखने योग्य अनुभव प्रदान किया है। साथ ही पूर्वोत्तर क्षेत्र में एक पट्टी एक मार्ग पहल का स्वागत किया गया है। इस से जुड़े विभिन्न देशों ने इस पहल का समर्थन करने की इच्छा प्रकट की।

हाल में पूर्वोत्तर क्षेत्र की परिस्थिति बेहतर हुई है, खास तौर पर चीन-रूस संबंध उच्च स्तर तक विकसित हो चुके हैं। एक खुला पूर्वोत्तर आर्थिक सर्कल क्षेत्रीय जनता को और ज्यादा लाभ देने के साथ साथ बहुपक्षीयवाद की रक्षा करने और अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था को आगे बढ़ाने में अहम शक्ति बन सकेगा।

(श्याओयांग)

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