टिप्पणी:कनाडा किसी का रक्षक बना रहता है?

2018-12-09 18:02:00

चीनी निजी कंपनी ह्वावेई की सीएफओ मंग वान चौ

अमेरिका की मांग पर कनाडा ने 1 दिसंबर को चीन की मशहूर निजी कंपनी ह्वावेई की सीएफओ मंग वान चौ को गिरफ्तार कर लिया। 6 दिसंबर को वैंकूवर कोर्ट में मंग वान चौ की जमानत पर सुनवाई हुई, लेकिन पाँच घंटों तक चली सुनवाई में कोई फैसला नहीं लिया गया।

मंग वान चौ को गिरफ्तार करने से न सिर्फ ह्वावेई कंपनी में, बल्कि चीनी जनता और चीनी सरकार में क्रोध पैदा हुआ है, और विश्व लोकमत में भी सनसनी फैल गई है। तथ्यों का पर्दाफाश होने से कनाडा की सरकार को अप्रत्याशित भारी कीमत चुकानी पड़ेगी।

कनाडा और अमेरिका की कानूनी प्रणाली हमेशा से न्यायता के नाम से सुसज्जित रहती है, लेकिन इस घटना के बाद से इनकी दादागीरी और दुष्टाचारी की सच्चाई जाहिर हो गयी है। अमेरिका ने छह साल पहले ही अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा के हवाले से ह्वावेई कंपनी की बिक्री को मना कर दिया था, इसलिए ह्वावेई कंपनी द्वारा अमेरिकी कानून का उल्लंघन किये जाने की बात मौजूद नहीं है। लेकिन अमेरिका ने इन्हीं कारणों से कनाडा से मंग वान चौ को गिरफ्तार करने की मांग की कि उन्होंने इरान के खिलाफ प्रतिबंध लगाने वाले आदेश का उल्लंघन किया है। उधर ह्वावेई कंपनी ने प्रथम समय पर वक्तव्य जारी कर कहा कि ह्वावेई कंपनी ने व्यवसाय देश के सभी कानूनों व नियमों, उनमें संयुक्त राष्ट्र, अमेरिका और यूरोप संघ के निर्यात प्रतिबंध कानून तथा अंतर्राष्ट्रीय कानून शामिल हैं, का पालन किया है।

3 अक्तूबर को संयुक्त राष्ट्र अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय ने यह फैसला लिया कि इरान के प्रति अमेरिका का प्रतिबंध इन दो देशों के बीच सन 1955 में हस्ताक्षरित आर्थिक संबंध व कौंसुलर अधिकार और दोस्ती संधि का उल्लंघन है और अमेरिका को ऐसा प्रतिबंध खत्म करने का फैसला लिया। अमेरिका ने इसके बाद उस संधि को रद्द कर दिया। आज अमेरिका ने अस्पष्ट अपराध से किसी एक विदेशी कंपनी के खिलाफ कदम उठाया जिससे उसकी हेगेमोनी और शक्ति की राजनीति का रुख जाहिर है।

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