टिप्पणीःक्या पोम्पियो की मध्य-पूर्व यात्रा से अमेरिकी रणनीति आगे बढ़ेगी

2019-01-15 19:03:00

अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने 15 जनवरी को जॉर्डन ,इराक ,मिस्र ,बहरीन ,यूएई ,कतर ,सऊदी अरब ,अम्मान और कुवैत की यात्रा पूरी की। अमेरिकी विदेश मंत्रालय से जारी बयान के अनुसार पोम्पियो की इस यात्रा का उद्देश्य इस क्षेत्र के मित्र देशों को भरोसा दिलाना है कि अमेरिका मध्य-पूर्व से नहीं निकलेगा और एक साथ ईरानी खतरे का निपटारा करेगा। एक हफ्ते की यात्रा में पोम्पियो ने इस उद्देश्य से केंद्रित रहकर मध्य-पूर्व देशों के नेताओं के साथ विचार कर समन्वय किया।

स्थानीय विश्लेषकों के विचार में वर्तमान अमेरिकी सरकार की मध्य-पूर्व नीति का मुख्य विषय अमेरिका और इस क्षेत्र के मित्र देशों के बीच संबंधों की बहाली कर इन देशों में अमेरिका का नेतृत्वकारी स्थान दोहराना, इन देश का नेतृत्व कर आर्थिक सुरक्षा बनाए रखना, आतंकवाद पर प्रहार करना, तथाकथित आतंकवाद समर्थक देश का विरोध करना है । अमेरिका की आशा है कि अपने मित्र देश शांति बनाए रखकर सहयोग चलाएंगे और ईरान के खिलाफ घेराबंदी करेंगे।

लेकिन यथार्थ दृष्टि से देखा जाए तो इज़रायल को छोड़कर बाकी देशों में कुछ न कुछ अमेरिकी रणनीति के कार्यांवयन पर बुरा प्रभाव डालने वाले सवाल मौजूद हैं।

ईरान को अलग करने के मुद्दे पर सऊदी अरब ,यूएई और बहरीन शायद अमेरिका का समर्थन करें, लेकिन कतर और अम्मान ईरान के साथ अच्छे संबंध रखते हैं और किसी पक्ष में खड़े नहीं होना चाहते ।कुवैत ईरान से समुद्र पार पड़ोसी है।उसे अपनी सुरक्षा का ख्याल रखना है। इसलिए अपना अपना हित देखते हुए मध्य-पूर्व के देश ईरान सवाल पर अमेरिका का पूरा समर्थन नहीं कर सकते । इसके अलावा कतर और सऊदी अरब जैसे देशों के रणनीतिक संकट और ओपेक से कतर के हटने से खाड़ी सहयोग परिषद की आंतरिक एकता को नुकसान पहुंचा है। अमेरिका द्वारा मध्य-पूर्व में अपनी रणनीति लागू करना आसान नहीं होगा।

(वेइतुंग)

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