टिप्पणी:वैश्वीकरण 4.0 का भविष्य सभी देशों के समान प्रयासों पर निर्भर

2019-01-22 18:33:00

22 जनवरी को दावोस में उद्घाटित विश्व आर्थिक मंच का माहौल उतना गर्म नहीं है। अमेरिका ने मंच में भाग नहीं लिया, फ्रांस और ब्रिटेन के नेताओं ने घरेलू कारणों से मंच में शामिल नहीं हो सके। और रूस व भारत के सर्वोच्च नेता भी मौके पर उपस्थित नहीं होंगे।

दावोस मंच में महत्वपूर्ण देशों के नेताओं की अनुपस्थिति से लोकलुभावनवाद और संरक्षणवाद से संपन्न राजनीतिक व आर्थिक अनिश्चितता के प्रति विश्व की चिन्ता जाहिर है। उधर इस वर्ष दावोस मंच का विषय स्पष्ट है:वैश्वीकरण 4.0,चौथी औद्योगिक क्रांति के युग का नया ढ़ांचा स्थापित। इससे यह साबित है कि वैश्वीकरण का नया युग आएगा। आज इंटरनेट के माध्यम से सारी दुनिया को एक ही गांव बनाया गया। बहुराष्ट्रीय कंपनियों का अनुसंधान, उत्पादन और बिक्री भिन्न-भिन्न देशों में किया जा रहा है। वैश्वीकरण 4.0 के नीचे ऐआई, रोबोट, इंटरनेट और चालक रहित कार जैसी नयी-नयी तकनीक उभरती जा रही हैं। विभिन्न देशों के बीच जटिल व्यवस्थाओं का इंटरकनेक्शन के माध्यम से विचारों और सेवाओं का आदान प्रदान किया जाएगा। यही वैश्वीकरण 4.0 का कोर है।

लेकिन आज की दुनिया में अमीरों और गरीबों के बीच फर्क बढ़ता जा रहा है। विश्व भर की प्रतिस्पर्द्धा में कुछ देशों की विजय होने के साथ साथ दूसरे देशों की हार भी मिलती है। कुछ विकसित देशों में लोकलुभावनवाद और संरक्षणवाद के बढ़ने से वैश्विकरण-विरोध का रूझान नजर आया है। वर्तमान दावोस मंच के उद्घाटन से पहले अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष ने इस वर्ष में विश्व आर्थिक वृद्धि दर को 3.5 प्रतिशत तक गिराया जो पिछले तीन सालों में सबसे कम है। उधर विश्व आर्थिक मंच के वर्तमान अध्यक्ष का कहना भी है कि वर्ष 2019 में पूरे विश्व में व्यापारिक और आर्थिक वृद्धि के सामने मौजूद खतरे के कारण आज अंतर्राष्ट्रीय सहयोग ढ़ांचे का पुनःनिर्माण करने की अभूतपूर्व आवश्यकता है।

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