टिप्पणी:चीन अंतरिक्ष उड़ान में विदेशों से सहयोग करेगा

2019-04-24 19:52:00

24 अप्रैल यानी चीन का अंतरिक्ष उड़ान दिवस के दौरान चीन के अंतरिक्ष उड़ान के बारे में अनेक खबरें जारी हुईं। चीन ने सफलतापूर्वक 12 अंतरिक्ष यान तथा थिएनकूंग नम्बर एक तथा नम्बर दो अंतरिक्ष प्रयोगशालाओं को कक्षाओं में स्थापित किये। चीन के कुल 14 अंतरिक्ष यात्रियों ने अंतरिक्ष में उड़ान भरी। वर्ष 2019 में चीन का 44वां पेइतो संचार उपग्रह भी प्रक्षेपित किया गया है। छांग-अ नम्बर 6 चंद्रयान का उड़ान तथा लघु तारा तक जाने और वापस लौटने वाला अंतरिक्ष सर्वेक्षण भी किया जाएगा। इसी दौरान चीन दूसरे देशों को समानव अंतरिक्ष उड़ान में भार लेने का मौका भी देगा।

चीन विश्व में तीसरा ऐसा देश है जो चंद्र की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग करने में समर्थ है। और विश्व में अब सिर्फ चीन चंद्र की सतह पर सर्वेक्षण कर रहा है। इससे पहले चीनी अंतरिक्ष ब्यूरो के जिम्मेदार व्यक्ति ने यह संकेत दिया था कि चीन वर्ष 2020 तक छांग-अ नम्बर 6 चंद्रयान प्रक्षेपित करेगा। इस मिशन में चीन के साथ सहयोग करने से दूसरे देशों के वैज्ञानिकों को भी चंद्र के बारे में ज्यादा नयी जानकारियां ग्रहित कर सकेंगे। फ्रांस के राष्ट्रीय अंतरिक्ष अनुसंधान केंद्र के प्रधान जीन-व्येस ले गाल ने कहा कि फ्रांस चीन के चंद्रयान अभियान में हिस्सा लेगा। इस का मतलब है कि फ्रांस भी चंद्र पर वैज्ञानिक अनुसंधान करेगा। हम ने पहले ऐसा काम कभी नहीं किया था। यह महान शुरुआत है।

वर्तमान अमेरिका, यूरोपीय संघ, भारत, जापान और इजराइल ने भी चंद्र डिटेक्टर प्रक्षेपित किया है। विभिन्न देशों के मिशन का उद्देश्य चंद्र की पूर्ण जानकारियां ग्रहित करना है। और इसमें वास्तविक सहयोग करने की आवश्यकता है। विश्व भर में संसाधन का संयुक्त रूप से प्रयोग करने और जानकारियों को साझा करने से अंतरिक्ष उड़ान का सही रास्ता होगा। मिसाल के तौर पर भारत के चंद्रयान नम्बर 1 पर लदे अमेरिकी नासा के संयंत्र ने चंद्र पर पानी की बर्फ तलाशने में सफलता पायी।

चीन के वैज्ञानिक उपग्रह के प्रक्षेपण से यह जाहिर है कि चीनी अंतरिक्ष उड़ान का मिशन भी अंतरिक्ष ज्ञान प्राप्त करने की ओर बदल गया है। चीन अपने तरीके से मानव के ज्ञान खोजने में अपना योगदान समर्पित करेगा।

( हूमिन )

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