चीन के निरस्त्रीकरण मामले के लिए विशेष राजदूत ने अमेरिका के परमाणु पारदर्शिता प्रस्ताव के पाखंड की आलोचना की

2019-05-23 11:13:00

चीन के निरस्त्रीकरण मामले के लिए विशेष राजदूत ने अमेरिका के परमाणु पारदर्शिता प्रस्ताव के पाखंड की आलोचना की

स्थानीय समय के अनुसार 22 मई को चीन के निरस्त्रीकरण के लिए विशेष राजदूत ली सुंग ने जिनेवा के निरस्त्रीकरण वार्ता सम्मेलन में भाषण देते हुए अमेरिका के परमाणु पारदर्शिता प्रस्ताव के पाखंड की आलोचना की।

ली सुंग ने कहा कि वर्तमान अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा वातावरण में बड़ा बदलाव आया, एकपक्षवाद और बदमाशी भरी हरकत की नई अभिव्यक्तियाँ बन गई हैं। शीत युद्ध की मानसिकता की वापसी व्यक्तिगत शक्तियों की राष्ट्रीय सुरक्षा नीतियों का मूलभूत अनुसरण बन गई है। यह देश देश की पूर्ण श्रेष्ठता और सुरक्षा हितों को अंतर्राष्ट्रीय अखंडता और नियमों से ऊपर रखकर अंतर्राष्ट्रीय संधियों और तंत्रों से हट गया। वह अपनी सामरिक आक्रामक और रक्षात्मक शक्तियों को मज़बूत करता है, तनाव बढ़ाता है, हथियारों की दौड़ को भड़काता है और रणनीतिक स्थिरता को कमज़ोर करता है।

ली सुंग ने कहा कि अमेरिका बार बार चीन के समुचित रक्षा निर्माण की आलोचना करता है, रूस-हथियार नियंत्रण समझौते में शामिल होने के लिए चीन को धकेलना चाहता है। अमेरिकी सरकार के उच्च स्तरीय अधिकारी ने सार्वजनिक रूप से कहा कि परमाणु ऊर्जा आधुनिकीकरण के पैमाने जैसे मुद्दों में चीन की पारदर्शिता की कमी के कारण अमेरिका ने चीन के परमाणु ऊर्जा विकास के इरादे पर सवाल उठाया है। चीन अमेरिका नहीं है, और चीन अमेरिका नहीं बनेगा। चीन जो कर रहा है वह अमेरिका की परमाणु रणनीति और परमाणु नीति नहीं है। अमेरिका के यह आरोप निराधार हैं। चीन, अमेरिका और रूस के बीच हथियार नियंत्रण वार्ता की पूर्वशर्त और आधार बिल्कुल मौजूद नहीं है। चीनी पक्ष कभी भी भाग नहीं लेगा।

ली सुंग ने जोर देते हुए कहा कि चीन की परमाणु रणनीति और परमाणु नीति सभी परमाणु हथियार वाले देशों में सबसे पारदर्शी हैं। चीन शांतिपूर्ण विकास के रास्ते का दृढ़ता से पालन करता है और आत्मरक्षा की परमाणु रणनीति अपनाता है। चीन का कभी कोई रणनीतिक इरादा नहीं था, और किसी भी देश को चीन के परमाणु हथियारों से खतरा नहीं होगा।

(वनिता)

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