अमेरिका के ताइवान और दक्षिण चीन सागर के प्रति गलत बयानों का विरोध करता है चीन

2019-06-02 16:38:00

चीन के प्रतिनिधि, चीनी केंद्रीय फौजी आयोग के एक वरिष्ठ अफसर श्याओ युवान मींग

18वीं शांगरी-ला सभा सिंगापुर में आयोजित हो रही है। 1 जून को अमेरिका के कार्यवाहक रक्षा मंत्री पैट्रिक शाहनाहान ने सभा में बयान देकर हिन्द-प्रशांत रणनीति का व्याख्यान दिया। इसे लेकर चीन के प्रतिनिधि, चीनी केंद्रीय फौजी आयोग के एक वरिष्ठ अफसर श्याओ युवान मींग ने कहा कि अमेरिकी प्रतिनिधि ने ताइवान और दक्षिण चीन सागर के सवाल पर पुराने रुख पर प्रकाश डाला। और अमेरिका अपने अन्दरूनी कानून के अनुसार ताइवान का समर्थन करेगा। चीन इस का डटकर विरोध करता है।

चीनी प्रतिनिधि ने कहा कि ताइवान प्राचीन काल से ही चीन का अखंडनीय भाग होता रहा है। एक चीन का सिद्धांत चीन-अमेरिका संबंधों का राजनीतिक आधार है। अमेरिका के द्वारा हाल ही में की गयी सिलसिलेवार कार्यवाहियों से एक चीन सिद्धांत तथा तीन चीन-अमेरिका विज्ञप्तियों का उल्लंघन हो गया है। ताइवान की स्वतंत्रता शक्तियों को इससे प्रेरित किया गया है। चीन का पुनरेकीकरण का ऐतिहासिक रूझान अनिवार्य है। अगर कोई शक्ति ताइवान को चीन से अलग करना चाहा, तो चीनी सेना किसी भी कीमत पर मातृभूमि के एकीकरण की रक्षा करेगी।

दक्षिण चीन सागर में नेविगेशन की स्वतंत्रता के सवाल पर चीनी प्रतिनिधि ने कहा कि चीन को दक्षिण चीन सागर के द्वीप समूहों तथा इन के आसपास क्षेत्रों के प्रति अखंडनीय अधिकार प्राप्त है। पर इस सागर में अमेरिका की सैनिक कार्यवाहियों से क्षेत्रीय शांति व स्थिरता के हित में नहीं है।

चीनी प्रतिनिधि के अनुसार सभा में उपस्थित चीनी रक्षा मंत्री वेइ फ़ंग चाओ ने 31 मई को अमेरिका के कार्यवाहक रक्षा मंत्री पैट्रिक शानाहान के साथ सकारात्मक और रचनात्मक वार्ता की। दोनों पक्षों ने चीनी और अमेरिकी सेनाओं के बीच स्थिर संबंधों को बनाये रखने पर सहमति संपन्न की।

( हूमिन )

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