(इंटरव्यू) भारतीय भाषाओं के साथ आगे बढ़े हिंदी- राष्ट्रपति भवन में ओएसडी

2019-06-04 11:19:00

राकेश दुबे के मुताबिक विदेशी छात्रों को हिंदी के प्रति आकर्षित करने के लिए भारत सरकार कुछ कार्यक्रम भी चला रही है। जैसे केंद्रीय हिंदी संस्थान आगरा में हिंदी सीखने के इच्छुक विदेशी विद्यार्थियों के लिए सौ से अधिक सीटें हैं। इसके साथ ही अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा आदि संस्थानों में भी हिंदी अध्यापन की व्यवस्था है। जहां पर विदेशी छात्र हिंदी की पढ़ाई कर सकते हैं।

सरकारी भाषा जटिल होती है, आम लोगों के बीच सरल शब्दों या शब्दावली को कैसे पहुंचाया जाएगा इसके जवाब में राकेश दुबे कहते हैं कि जब हम पढ़ाई-लिखाई की बात करते हैं, तो वह भाषा आम बोलचाल की भाषा से थोड़ा अलग होती है। अगर हम किताबी शब्दों को इस्तेमाल में लाएंगे तो हमें वे शब्द सरल लगने लगेंगे। और हां, बोलचाल की भाषा का इस्तेमाल बोलचाल में अच्छा रहता है। लेकिन पाठ्य पुस्तकों और साहित्य में मानक हिंदी संबंधी शब्दों का प्रयोग करना होगा। शायद शुरुआत में ऐसा लग सकता है कि वह कठिन हिंदी है, लेकिन जैसे-जैसे हम आगे बढ़ेंगे, हम उन शब्दों से परिचित होते जाएंगे और सरलता आती जाएगी।

विश्व की दूसरी भाषाओं के सामने हिंदी की मौजूदगी के प्रश्न पर उन्होंने बताया कि हिंदी संस्कृत की उत्तराधिकारिणी भाषा है, भारत की राजभाषा है। विश्व में इस समय तीसरे नंबर पर बोली जाने वाली भाषा है। भारत की लगातार हो रही प्रगति और उत्थान के साथ ही भारतीय भाषाओं खासकर राजभाषा हिंदी का महत्व भी बढ़ता जाएगा।

अनिल आज़ाद पांडेय

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