टिप्पणी:अमेरिकी सांसद मार्को रूबियो का असली चेहरा

2019-06-19 14:44:00

अमेरिकी सीनेट के सदस्य मार्को रूबियो ने 17 जून को संसद के समक्ष एक बिल प्रस्तुत किया जिसमें चीनी कंपनी ह्वावेई को अमेरिकी न्यायालय के माध्यम से अमेरिकी कंपनियों से पेटेंट शुल्क लेने से मना करने की मांग की।

खबर प्राप्त होने के बाद अमेरिका और दूसरे देशों के नेटिजनों को हैरानी हुई, क्योंकि अमेरिका हमेशा बौद्धिक संपदा अधिकार के संरक्षण को महत्व देता रहा है। पर आज अमेरिकी सांसद ने वैधानिक माध्यम से विदेशी कंपनी के बौद्धिक संपदा अधिकार से वंचित करने की मांग की। इस के मुताबिक विदेशी कंपनियों को अमेरिका को पेटेंट शुल्क चुकाना पड़ता है, जबकि उन्हें अमेरिका से पेटेंट शुल्क लेने से मना किया जाता है। यह सरासर लूट-खसोट है।

रूबियो को अमेरिकन रिपब्लिकन पार्टी में चीन का विरोध करने वाला उग्र विचारों का व्यक्ति माना जाता है, जिसने अनेक बार चीन पर अमेरिका के बौद्धिक संपदा अधिकार की चोरी लगाने की आरोप लगाया है और अमेरिका की सुरक्षा पर ह्वावेई कंपनी के खतरे का प्रसारण किया है। लेकिन आज जब ह्वावेई कंपनी ने अमेरिका के मोबाइल नेटवर्क ऑपरेटर से 230 पेटेंट का एक अमेरिकी डॉलर शुल्क लेने की मांग की है, तब रूबियो ने बौद्धिक संपदा अधिकार के बारे में चर्चित सिद्धांत को छोड़कर ह्वावेई कंपनी की कड़ी निन्दा की और कानून बनाकर ह्वावेई के वैधानिक अधिकार को मना करने की मांग की। रूबियो का यह राजनीतिक खेल अनैतिक है और इससे बौद्धिक संपदा अधिकार के सवाल पर दोहरा मापदंड जाहिर होता है। यानी कि जब विदेशी कंपनी अमेरिका के पेटेंट का प्रयोग करता है, तो बौद्धिक संपदा अधिकार के महत्व को मजबूत करेगा। लेकिन जब अमेरिकी कंपनी विदेशी बौद्धिक संपदा अधिकार का प्रयोग करता है, तो सिद्धांत को पलटा जा सकता है। रूबियो जैसे आदमियों की आंखों में बौद्धिक संपदा अधिकार एक औजार है। वे अपनी मर्जी से इस औजार का प्रयोग करते हैं। लेकिन रूबियो ने अपनी अवैधानिक बिल के जरिये अमेरिका को बदनाम किया है। क्योंकि पूरा विश्व यह देख पाता है कि बौद्धिक संपदा अधिकार के सवाल पर अमेरिका का मानक दोहरा है।

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