टिप्पणीः अगर हमेशा अपना वचन तोड़ेगा, तो वार्ता का अच्छा परिणाम नहीं होगा

2019-08-03 18:40:00

अमेरिका ने हाल ही में एक बार फिर घोषणा की कि 1 सितंबर से 3 खरब डॉलर के चीनी माल पर 10 प्रतिशत टैरिफ़ बढ़ाई जाएगी। इसके साथ साथ अमेरिका ने चीन के साथ चतुर्मुखी आर्थिक और व्यापारिक समझौता संपन्न करने के लिए सक्रिय वार्ता करने की आशा भी जताई। अमेरिका एक तरफ़ दोनों देशों के नेताओं के बीच जापान के ओसाका में हासिल सहमति का उल्लंघन करता है, वहीं दूसरी तरफ़ वार्ता का संतोषजनक परिणाम भी पाना चाहता है। अमेरिका के कुछ लोगों का विचार समझना सचमुच मुश्किल है। वफ़ादारी वार्ता करने का आधार है। अक्सर अपना विचार बदलते रहने वाला वार्ताकार कैसे दूसरों पर विश्वास जमा सकता है?

पिछले एक वर्ष से चीन ने हमेशा से वफ़ादारी के आधार पर बड़ी सदिच्छा के साथ अमेरिका के साथ सलाह मश्विरा किया और बड़ी प्रगति पाई। लेकिन अमेरिका ने चार बार सहमति का उल्लंघन किया और अपना वचन तोड़ा, जिससे वार्ता में बाधाएं पड़ें। सभी जिम्मेदारी अमेरिका को उठानी पड़ती है। वार्ता दोनों पक्षों की बात है। समझौता संपन्न करना चाहते हैं, तो दोनों पक्षों को वफ़ादारी के साथ प्रतिकूल दिशा में आगे बढ़ाना चाहिए। पिछले एक साल में चीन हमेशा से सहमति का सक्रिय कार्यांवयन करता रहता है और अपने वचन का पालन करता है, जबकि अमेरिका अपना विचार बदलते रहता है, जिसने अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को हैरान कर दिया।

अब अमेरिका के तमाम व्यावसायिक संघों ने वक्तव्य जारी कर चीन के माल पर टैरिफ़ बढ़ाने के लिए व्हाइट हाउस का विरोध किया और कहा कि इससे अमेरिका के किसानों, मज़दूरों और उपभोक्ताओं को और बड़ा नुकसान पहुंचेगा।

चीन हमेशा मानता है कि टैरिफ़ बढ़ाने से समस्या का समाधान नहीं हो सकता, सिर्फ़ वार्ता करने से मतभेद दूर हो सकेगा। चीन किसी भी दबाव और खतरे को नहीं डरता और चुनौतियों के मुकाबले सभी तैयारी कर चुका है। अगर अमेरिका टैरिफ़ बढ़ाने पर कायम रहता, तो चीन को देश और जनता के हितों की रक्षा के लिए आवश्यक जवाबी कदम उठाना पड़ेगा। अगर अमेरिका हमेशा अपना वचन तोड़ेगा, तो वार्ता में अच्छा परिणाम नहीं मिलेगा।

(ललिता)

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