टिप्पणी:चीन तर्कसंगत ढंग से व्यापार बदमाशी का मुकाबला करेगा

2019-08-26 20:17:00

बीते एक वर्ष में अमेरिका ने अनेक बार अपने वादे को तोड़कर चीनी उत्पादों पर अधिक कर वसूली लगाने के कदम उठाये। अमेरिका की धौंस के मुकाबले में चीन को विवश होकर जवाबी कदम उठाने पड़े। यह किसी भी संप्रभु देश के द्वारा अपने हितों की रक्षा के लिए उठाया गया जरूरी कदम है। लेकिन चीन के कदम से अमेरिका के आधिपत्य को उत्तेजित किया गया है। इन के विचार में अमेरिका विश्व में एक मात्र ही सुपर पॉवर है। अमेरिका के वर्चस्व को कोई भी चुनौती अस्वीकृत है। और दूसरे देशों को अमेरिका के कर वसूली कदम का मुकाबला करने का अधिकार नहीं है। अमेरिका के एकतरफा और संरक्षणवाद पर आधारित आधिपत्य वाले तर्क से अंतर्राष्ट्रीय नियम को गंभीरता से नुकसान पहुंचाया गया है। सहयोग और उभय-जीत अनिवार्य ऐतिहासिक प्रवृत्ति है। इसी कारण से अमेरिका द्वारा विश्व में छेड़े गये व्यापार युद्ध का दूसरे व्यापार सहयोगियों द्वारा सख्ती से विरोध किया गया है। मिसाल के तौर पर भारत ने 16 जून से 28 तरह के अमेरिकी उत्पादों के खिलाफ टैरिफ लगाने का फैसला किया। यूरोपीय संघ ने भी 35 अरब यूरो के अमेरिकी वस्तुओं पर कर वसूली लगाने का ऐलान किया। जी 7 शिखर सम्मेलन के दौरान यूरोप और जापान आदि ने भी अमेरिका द्वारा व्यापार युद्ध छेड़ने के प्रति असंतोष जताया। फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमेनुअल मैक्रों ने कहा कि व्यापार युद्ध से बचने के लिए तनाव को शिथिल बनाने का उपाय अपनाना चाहिये। यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष डोनाल्ड टस्क ने भी चेतावनी दी है कि अमेरिका और अन्य देशों के बीच बढ़ते व्यापार तनाव से विश्व के दायरे में आर्थिक मंदी पैदा होने का खतरा मौजूद है। अमेरिका की व्यापार बदमाशी का दुनिया भर में व्यापक रूप से विरोध किया गया है। जब कि चीन ने अमेरिका की व्यापार धौंस के प्रति ठंडे दिमाग से कदम उठाया है। चीन के संयम से कदम उठाने और समग्र स्थिति पर ध्यान देने वाले रुख को व्यापक प्रशंसा मिली है।

न्यूज़ व्यापार पर्यटन बाल-महिला स्पेशल विश्व का आईना चीनी भाषा सीखें वीडियो फोटो गैलरी