टिप्पणीः हरित चीन से विश्व पारिस्थितिक सभ्यता हुई उन्नत

2019-10-07 18:13:00

इस साल फरवरी में नासा द्वारा छोड़े गए दो पृथ्वी अवलोकन उपग्रहों के आंकड़ों से जाहिर है कि पृथ्वी 20 साल पहले की तुलना में और हरी बन गई है। इसका कारण है चीन और भारत में वनरोपण और कृषि घनापन। वर्ष 2000 से 2017 तक पूरी दुनिया में वनरोपण के क्षेत्रफल में 5 प्रतिशत का इजाफा हुआ, जिसमें चीन में वनस्पति की वृद्धि दुनिया की कुल वृद्धि का 25 फीसदी से अधिक है, जो दुनिया के पहले स्थान पर रही।

हरित विकास बढ़ाने में चीन के प्रयास की संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम ने प्रशंसा की। संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम ने चीन के पश्चिमोत्तर, उत्तर और उत्तर-पूर्वी इलाके में की गई रक्षा-वन परियोजना को विश्व रेगिस्तान का पारिस्थितिक आर्थिक मिसाल क्षेत्र निर्धारित किया और इस साल सितंबर में चीन के इंटरनेट पर्यावरण संरक्षण कार्यक्रम ऐन्ट फॉरिस्ट (ANT FOREST) को पर्यावरण संरक्षण में सर्वोच्च गौरव पृथ्वी संरक्षक पुरस्कार के अधीनस्थ प्रोत्साहन और कार्य पुरस्कार से सम्मानित किया गया। यह लगातार तीसरे साल चीन को यह पुरस्कार मिला है।

चीन में पारिस्थितिकी पर्यावरण में सुधार और हरित विकास में हासिल प्रगति के चीन सरकार की नीति और निगरानी के बीच घनिष्ठ संबंध है। चीन ने पर्यावरण संरक्षण को बुनियादी राष्ट्रीय नीति बनाया और अनवरत विकास को राष्ट्रीय रणनीति तक उन्नत किया। चीन ने संसाधन संरक्षण और पर्यावरण अनुकूल वाले समाज का निर्माण करने का प्रस्ताव पेश किया और पारिस्थितिक सभ्यता के निर्माण को सरकार की 13वीं पंचवर्षीय योजना में शामिल किया।

पिछले सालों में चीन ने क्रमशः पारिस्थितिकी पर्यावरण से जुड़े 9 कानून और 20 से अधिक नियम बनाये या संशोधित किये, जिससे जलवायु, पानी, मिट्टी, प्राकृतिक पारिस्थितिकी और परमाणु सुरक्षा आदि से संबंधित नियम व्यवस्था स्थापित की गई। वर्ष 2015 में चीन ने इतिहास में सबसे गंभीर नया पर्यावरण संरक्षण कानून लागू किया, जिससे कानून के उल्लंघन कार्रवाई के विरोध में महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ा।

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