टिप्पणीः मतभेदों को किनारे रखकर समानताओं की खोज करें

2019-10-12 15:42:00

नए चरण की चीन-अमेरिका आर्थिक वार्ता 11 अक्तूबर को वाशिंगटन में समाप्त हुई। पिछले दो दिन में दोनों पक्षों ने शीर्ष नेताओं की सहमति के निर्देशन में समान दिलचस्पी वाले आर्थिक मुद्दों पर खुले रवैये से कारगर और रचनात्मक विचार-विमर्श किया। दोनों पक्षों ने कृषि, बौद्धिक संपदा अधिकार की रक्षा, विनिमय दर, वित्तीय सेवा, व्यापारिक सहयोग, तकनीकी हस्तांतरण और विवाद के समाधान आदि में सार्थक प्रगति की। दोनों पक्षों ने आने वाली वार्ता के प्रबंध पर चर्चा की और अंतिम समझौता संपन्न करने की दिशा में समान प्रयास करने पर सहमति बनाई।

यह परिणाम प्रशंसनीय है। इससे जाहिर है कि चीन और अमेरिका ने विवेकशील और व्यवहारिक रवैये से समस्या के समाधान की दिशा में एक कदम बढ़ाया, जिससे व्यापारिक संघर्ष बिगड़ने से बचा। यह लोगों की इच्छा और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की अपेक्षा के अनुरूप है।

दुनिया में सबसे बड़ी दो आर्थिक शक्तियां होने के नाते चीन और अमेरिका के बीच आर्थिक और व्यापारिक समस्या जटिल है। इसका समाधान एक ही कदम में सफल नहीं हो सकता। पिछले एक साल से अधिक समय की स्थिति से देखा जाए, दोनों पक्षों को समझना चाहिए कि मतभेदों को किनारे रखकर समानताओं की खोज करना जरूरी है। सरल से जटिल स्थिति की ओर बढ़ने और कदम ब कदम आगे बढ़ने से अंतिम समझौता संपन्न करना समस्या के समाधान का ठोस उपाय है।

तथ्यों से जाहिर है कि अतिरिक्त कर लगाने से समस्या का समाधान नहीं हो सकता। इसके विपरीत चीन और अमेरिका, यहां तक कि अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को नुकसान पहुंचेगा। अमेरिका के व्यवसाय समुदाय ने टैरिफ न बढ़ाने की इच्छा जताई। उन्हें आशा है कि चीन और अमेरिका को मतभेदों का समाधान करने और व्यापारिक युद्ध समाप्त करने का उपाय मिल पाएगा। चीन भी चाहता है कि विवेकशील रवैये से वार्ता और सहयोग के जरिए समस्या का समाधान किया जाएगा। लेकिन महत्वपूर्ण सैद्धांतिक मुद्दों पर चीन रियायत नहीं देता है और हर स्थिति के मुकाबले की तैयारी कर चुका है। चाहे स्थिति में कोई भी बदलाव क्यों न आए, चीन लगातार सुधार और खुलापन करेगा और उच्च गुणवत्ता वाला आर्थिक विकास करेगा।

(ललिता)

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