ऐम्डो काउंटी में तिब्बती हिरण का संरक्षण

2017-09-28 18:12:01

तिब्बती हिरण छींगहाई-तिब्बत पठार पर रहने वाले विशेष किस्म का मृग है । स्थानीय लोगों ने विलुप्त होने के कगार पर रहने के ऐसे जंगली पशु के संरक्षण को बहुत महत्व दिया है । बीस साल पहले तिब्बत के नाग्छू क्षेत्र की ऐम्डो काउंटी में बर्फ़ीले तूफ़ान का हमला हुआ था । खाद्य पदार्थ खोजने के लिए कुछ तिब्बती हिरण स्थानीय चरवाहों के चरागाह में प्रविष्ट हुए । चरवाहों ने इन मूल्यवान पशुओं का अच्छी तरह संरक्षण किया । आज तक इस क्षेत्र में रहने वाले तिब्बती हिरणों की संख्या तीन सौ से अधिक रही है जो लोगों के पालतू पशुओं के साथ मिलनसार तौर पर रहे हुए हैं ।

सन 1997 के अक्तूबर में ऐम्डो काउंटी में भारी बर्फ़ीले तूफ़ान का हमला हुआ । घासमैदान के सभी कोने पर मोटी मोटी बर्फ से आवृत किया गया था । बर्फ बंद होने के बाद तिब्बती चरवाहा बूगेन अपने घर से निकलकर घास मैदान का दौरा करने गया । घास मैदान के बाड़ के सामने बूगेन ने देखा कि ठंडा मौसम और भूख से मारे अनेक पशु बर्फ पर पड़े दिखाई दे रहे थे । बूगेन के दिल में बहुत दुख महसूस हुआ । कुछ और आगे चलकर उन्होंने आश्चर्य से देख पाया कि बाड़ के अन्दर में दसेक तिब्बती हिरण एकजुट होकर आराम कर रहे थे । यह पहली बार थी कि बूगेन ने अपनी आंखों से तिब्बती हिरण देख लिया । उसी दिन की याद करते हुए बूगेन ने कहा,“तिब्बती हिरण देखकर मैं बहुत ही हैरान हुआ । एक क्षण में रहकर मैं ने तुरंत ही वापस जाकर गांव के मुखिया को बताया कि वहां पर कुछ तिब्बती हिरण आये ।”

गांव के मुखिया गूत्से बहुत ईमानदार आदमी हैं । वे गांववासियों में बहुत प्रतिष्ठित हैं । बूगेन की बात सुनने के बाद गूत्से जल्द ही खुद घास मैदान में इन तिब्बती हिरण देखने गये । गूत्से ने सोचा कि आम तौर पर तिब्बती हिरण आदमी से दूर रहते हैं, लेकिन आज ये जंगली पशु क्यों आदमी के मैदान में आये हैं । बेशक, भारी बर्फ गिरने से खाद्य पदार्थ की तलाश करने से विवश होकर वे यहां आ गये हैं । गूत्से ने सभी गांववासियों को तिब्बती हिरणों को खदेड़ मत करने बताया और तुरंत ही काउटी सरकार को यह रिपोर्ट की । गूत्से ने याद करते हुए कहा,“यह घास मैदान गर्भवती पशुओं के लिए सुरक्षित है जो प्रति वर्ष अप्रैल से जून तक खुलता है । दूसरे समय इसे आम तौर पर बन्द किया जाता है । लेकिन तिब्बती हिरण पठार पर शुभंकर माना जाता है । इसलिए हम ने इन तिब्बती हिरण को यहां रहने दिया ।”

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