तिब्बत की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण में अथक कोशिशें

2017-10-24 15:48:01

तिब्बत एक ऐसा स्थल है जहां असाधारण प्राकृतिक दृश्य के साथ साथ समृद्ध ऐतिहासिक संस्कृति का संसाधन भी मौजूद है । चीन सरकार तिब्बत स्वायत्त प्रदेश में सांस्कृतिक विरासतों के संरक्षण को बहुत महत्व देती है । विश्व प्रसिद्ध पोताला पैलेस के अलावा तिब्बत में हजारों सांस्कृतिक अवशेष संरक्षित किये गये हैं । तिब्बत में सांस्कृतिक अवशेषों की रक्षा के लिए सरकार ने पर्यटकों को सर्विस तैयार करने के साथ साथ विरासतों के संरक्षण में अनेक कदम उठाये हैं ।

पोताला पैलेस तिब्बत की राजधानी ल्हासा शहर में ल्हासा नदी के पास खड़ता है । वह तिब्बत का सबसे बड़ा भवन है जिसकी तस्वीर चीनी मुद्रा आरएमबी के 50 युआन नोट के पीछे मुद्रित की जाती हैं । सन 1994 में पोताला पैलेस को विश्व की ऐतिहासिक व सांस्कृतिक विरासत सूची में शामिल कराया गया । हर वर्ष लाखों हजारों पर्यटकों को पोताला पैलेस की ओर आकर्षित किया जा रहा है । इस विश्व मशहूर सांस्कृतिक अवशेष के संरक्षण के लिए सरकार ने वर्ष 2008 से पोताला पैलेस का दौरा करने वाले पर्यटकों की संख्या को परिसीमित करना शुरू किया । पर्यटकों को एक दिन पहले टिकट बुक करना होगा और निर्दिष्ट समय पर पोताला का दर्शन करना होगा । गर्मी के मौसम यानी पर्यटन के व्यस्त समय में प्रति दिन पोताला पैलेस का दर्शन करने वाले व्यक्तियों की संख्या 5000 तक सीमित किया जाता है । पोटाला पैलेस के प्रबंधन कार्यालय के उप निदेशक जोर्देन ने कहा कि सांस्कृतिक अवशेषों के संरक्षण के लिए पर्यटकों की संख्या को सीमित करना पड़ता है । उन्हों ने कहा,“पोताला पैलेस में बहुत से लकड़ी पुर्जे हैं और पैलेस के अन्दर में चैनल, सीढ़ियां और हॉल आदि संकीर्ण भी हैं । इसलिए हम ने पैलेस और पर्यटकों दोनों की सुरक्षा के लिए यह कदम उठाया है । नहीं तो इमारत गिरने का खतरा भी मौजूद है ।”

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