तिब्बती इतिहास का अनुसंधान

2018-04-03 09:32:02

28 मार्च को तिब्बत में जनवादी रुपांतर चलाने और तिब्बती भू-दासों की मुक्ति का दिवस होता है। यह दिवस मनाने के लिए चीन के तिब्बती अध्ययन केन्द्र ने एक विशेष संगोष्ठी का आयोजन किया। मौके पर उपस्थित विद्वानों ने अपने अनुसंधान के माध्यम से यह साबित कर दिया कि तिब्बत प्राचीन काल से ही चीनी प्रादेशिक भूमि का एक अंक होता है और तिब्बती जाति भी चीनी राष्ट्र में महत्वपूर्ण सदस्य है। तिब्बती परंपरागत संस्कृति को भी चीनी राष्ट्र में बहु सांस्कृतिक घटक के रूप में माना जाना चाहिये।

इतिहासकारों का मानना है कि प्राचीन काल में तिब्बती पठार की संस्कृति कोई पृथक संस्कृति नहीं थी जिस के पीली नदी से केंद्रीय मुख्य भूमि के साथ घनिष्ठ संबंध बने हुए थे। इतिहास के विकास के चलते तिब्बती जाति चीनी राष्ट्र के समुदाय में शामिल हो चुकी थी। सछ्वान विश्वविद्यालय के तिब्बती अध्ययन केन्द्र के प्रधान हो वेई ने कहा,“प्राप्त सामग्रियों से यह साबित किया गया है कि प्राचीन काल से ही तिब्बती संस्कृति कोई पृथक संस्कृति नहीं थी, वह एक ओपन सिस्टम था। प्राचीन काल से ही तिब्बती जाति पीली नदी के क्षेत्रों के साथ घनिष्ठ संबंध बनाये रखती थी। मिसाल के तौर पर बाजरा जैसे कृषि उत्पाद और जेड से बने यंत्र, सब पीली नदी के सांस्कृतिक मंडल से संबंधित हैं। इसी संदर्भ में बहुत से वैचारिक, राजनीतिक, सांस्कृतिक और तकनीकी सबूत तैयार हैं। तिब्बती संस्कृति और पीली नदी के क्षेत्रों की संस्कृति के बीच में हमेशा घनिष्ठ संपर्क रखे हुए हैं। और यह कनेक्शन आपसी भी है। रेशम, कुछ विशेष कलात्मक पैटर्न, और पेपर-मेकिंग तकनीक आदि तिब्बती पठार में प्रचलित हो गयी थी, उधर भीतरी इलाकों के लोगों ने भी तिब्बती पठार से सोने व चांदी यंत्र बनाने की स्किल और ड्रेसिंग स्टाइल आदि सीख लिया था।”

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