हरे पहाड़ स्वर्ण पहाड़ ही हैं---तिब्बत में पारिस्थितिक सभ्यता का निर्माण

2018-04-24 10:32:03

इधर के वर्षों में तिब्बत स्वायत्त प्रदेश में पारिस्थितिक सभ्यता का निर्माण मजबूत किया जा रहा है। स्थानीय सरकार ने हरे पहाड़ स्वर्ण पहाड़ ही हैं के विचार से प्राकृतिक वातावरण को सुरक्षित करने में अथक प्रयास किया है, जिससे आर्थिक व सामाजिक निर्माण को आगे बढ़ाने के साथ-साथ गरीबी उन्मूलन आन्दोलन में भी मदद दी गयी है।

तिब्बत के प्राकृतिक वातावरण संरक्षण कार्यों में वृक्षारोपण और वनीकरण परियोजना को महत्व दिया गया है। नवीनतम आंकड़े बताते हैं कि तिब्बत स्वायत्त प्रदेश में वन का क्षेत्रफल 1 करोड़ 79 लाख हैक्टर तक जा पहुंचा है, जो वर्ष 2011 की तुलना में 1.4 लाख हैक्टर अधिक रहा है। तिब्बती वनों में लकड़ी की बचत मात्रा 2.28 अरब घन मीटर तक जा पहुंची है।

स्वायत्त प्रदेश के गरीबी उन्मूलन कार्यालय के एक पदाधिकारी का कहना है कि तिब्बत में पारिस्थितिक संरक्षण परियोजना को गरीबी उन्मूलन के साथ-साथ जोड़ा जाएगा। गरीब क्षेत्रों में स्थानांतरण के मुआवजे खर्च में वृद्धि की जाएगी और रेत-विरोध और वृक्षारोपण के कार्यों में गरीब लोगों को शामिल किया जाएगा, ताकि पारिस्थितिक संरक्षण के दौरान गरीब लोगों को गरीबी से मुक्त किया जा सके।

तिब्बत स्वायत्त प्रदेश के गरीबी उन्मूलन कार्यालय के उप प्रधान लू क्वो ह्वा ने कहा,“तिब्बत को देश में सबसे महत्वपूर्ण प्राकृतिक सुरक्षा की बाधा मानी जा रही है। हमें प्रकृति का समादर करना चाहिये और प्राकृतिक संरक्षण उपलब्ध कर देने की पूर्वशर्त पर इस क्षेत्र का विकास करना चाहिये। गरीब लोगों का दूसरे क्षेत्रों में स्थानांतरण करना इस कार्य में महत्वपूर्ण भाग है। साथ ही कृषि उपयोगी सुविधाओं का निर्माण करने में भी पूरे क्षेत्र के सहयोगात्मक विकास पर विचार करने की बड़ी आवश्यकता है। इस तरह हम आर्थिक विकास का लक्ष्य संपन्न करते समय गरीबी उन्मूलन और प्राकृतिक संरक्षण के बीच संबंधों को निपटरा करना चाहिये।”

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