शनचन- एक छोटे मछुआरे गांव से बना मेट्रो शहर

2018-06-14 19:32:01

शनचन- एक छोटे मछुआरे गांव से बना मेट्रो शहर

इस वर्ष चीन के सुधार और खुलेपन की 40वीं वर्षगांठ है। दक्षिणी चीन में स्थित शनचन शहर चीन के सुधार और खुलेपन की खिड़की और साक्षी भी है। चालीस वर्षों में शनचन एक छोटे मछुआरे गांव से एक अंतरराष्ट्रीय मेट्रो शहर बन गया है। हाल ही में सीआरआई के संवाददाता ने शनचन के लुओ हू जिले के मछुआरे गांव का दौरा किया। यह छोटा गांव शनचन के तेज़ विकास की झलक है।

ये मछुआरा गांव हांगकांग से सटा हुआ है। पिछली सदी के तीस और चालीस के दशक से क्वांग तुंग के तुंग क्वेन क्षेत्र के कुछ मछुआरे शनचन नदी के तट पर आये और मछली पकड़ने का काम करने लगे। पोट मछुआओं का उत्पादन साधन था और उनका घर भी था। मछुआरे गांव के 80 वर्षीय वू चिनछिंग ने याद करते हुए कहा ,पहले हम छोटी नावों में रहते थे। नाव पाँच मीटर लंबी और एक मीटर से ज्यादा चौड़ी होती थी। घर के कई व्यक्ति वहां रहते थे। जीवन बहुत कठोर था। उस समय हम तूफान से बहुत डरते थे। जब तूफान आता था, तो हमें नाव को तट पर खींचना पड़ता था।

शनचन- एक छोटे मछुआरे गांव से बना मेट्रो शहर

पिछली सदी के 70 वाले दशक के अंत में क्वांग तुंग प्रांत सरकार ने केंद्रीय सरकार से कुछ विशेष नीति देकर शनचन, चूहाई और शानथो में निर्यात प्रसंस्करण क्षेत्र स्थापति करने की मांग की ,क्योंकि क्वांग तुंग का हांगकांग और मकाओ से लगने और बड़ी संख्या में प्रवासी चीनियों का लाभ मिलता है। तत्कालीन चीनी नेता तंग श्याओपिंग ने इस योजना का समर्थन किया। अगस्त 1980 में चीनी राष्ट्रीय जन प्रतिनिधि सभा की स्थाई समिति ने क्वांग तुंग में विशेष आर्थिक क्षेत्र की नियमावली को मंजूरी दी। विशेष आर्थिक क्षेत्र चीन में स्थापित किये गए।

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