तिब्बत में पारंपरिक हस्तशिल्प---बांस बुनाई

2018-07-05 11:32:08

तिब्बत में पारंपरिक हस्तशिल्प---बांस बुनाई

तिब्बती पठार पर अनेक जातियां रहती हैं जिनका अपना अपना हस्तशिल्प कला उपलब्ध है। यालूजांबू नदी के तट पर स्थित मेडोक काउंटी में रहती लोबा और मेनबा जाति के लोगों की बांस और रतन की बुनाई करने वाली कौशल बहुत मशहूर है। उन में मेडोक काउंटी के देशींग जिले में बांस बुनाई का हस्तशिल्प कला असाधारण बताया जा रहा है।

मेडोक काउंटी की सरकार ने गरीबी उन्मूलन को बढ़ाने के लिए बांस और रतन की बुनाई कौशल के विकास को बहुत जोर दिया। देशींग जिले में सांस्कृतिक उद्योग की दृष्टि से बांस बुनाई का विकास किया जा रहा है। देशींग जिले के उप प्रधान शेरब दोर्जे ने कहा,“वर्ष 2013 में सरकार के कार्य दल ने हमारे यहां 29 किसानों व चरवाहों को सछ्वान प्रांत की छींगशेन काउंटी में बांस बुनाई सिखवाने भेजा। वर्ष 2015 में पेइचिंग के एक बांस और रतन फर्नीचर कारखाने ने भी यहां के लोगों को नया बांस बुनाई स्किल सिखाया। इससे पहले हमने केवल पारंपरिक वाला बनाया था।”

शेरब दोर्जे ने कहा कि देशींग जिले में बांस और रतन बुनाई का विकास करने का उद्देश्य, पारंपरिक कौशल विरासत सुरक्षित करने के सिवा गरीबी उन्मूलन का लक्ष्य भी साकार करना है। पहले देशींग में बांस बुनाई की कौशल पिछड़ी हुई थी और उत्पादों का बाजार भी नहीं हुआ। सरकार की मदद में देशींग के किसानों ने बांस बुनाई का विकास कर ग्रीन उद्योग का रास्ता खोल दिया। वर्ष 2013 में न्यिंग-ची शहर की सरकार ने देशींग में 37 लाख युवान की पूंजी डालकर एक बांस और रतन बुनाई कारखाना स्थापित किया। इस सहकारी के मैनेजर चांग ई च्वन ने कहा,“आम तौर पर किसान पहाड़ों में बांस और रतन एकत्र कर हमारे कारखाने को बेचते हैं। कारखाने में इन बांस और रतन की सामग्रियों का प्रोसेसिंग किया जाता है। इस के बाद किसानों के घर में इन प्रसंस्कृत सामग्रियों से हस्तशिल्प वस्तुएं बनाई जाएगी। सहकारी सभी उत्पादन वस्तुओं की बिक्री करने के जिम्मेदार है। बाहर में हमारे दुकान भी हैं।”

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