तिब्बती चाय की संस्कृति का इतिहास और विकास

2018-08-22 13:32:01

प्राचीन काल में तिब्बती पठार पर रहने वालों के खाद्य पदार्थों में मुख्य रूप से जौ, मांस और दूध जैसे शामिल थे। तिब्बती चाय पीने से उन्हें भिन्न भिन्न विटामिन और लाभदायक तत्वों का पूरक हो सकता था। तिब्बती लोग दीर्घकाल तक ऐसे चाय की आपूर्ति पर निर्भर रहते थे। तिब्बती और हान जातीय लोगों के बीच चाय व दूसरे मालों के आयात-निर्यात से उन के संबंधों को मजबूत किया गया था। परिवहन और भंडारण की सुविधा के लिए तिब्बती चाय को आम तौर पर ईंट के आकार में दबाया जाता था। तिब्बती चाय बनाने का यह प्रक्रिया आज तक पारित किया गया है।

मंग डींग शान क्षेत्र में तिब्बती चाय की विशेष संस्कृति का उत्तराधिकार करने के लिए स्थानीय सरकार ने इतिहास से छोड़ी गई स्किल के विकास पर बहुत महत्व दिया है। या-आन शहर के संस्कृति व पर्यटन समूह की उप प्रधान यीन ली ह्वा ने कहा कि मंग डींग शान क्षेत्र के ऐतिहासिक शर्तों और अच्छे वातावरण से तिब्बती चाय के विकास के लिए अनुकूल स्थितियां तैयार हो गयी हैं। उन्होंने कहा,“मंग डींग शान पर्वत को चाय संस्कृति का तीर्थ स्थल माना जाता है। हम इस के सहारे चाय संस्कृति का विकास करते हैं और अपने चाय संसाधन का प्रयोग करते हैं जिससे आर्थिक विकास किया गया है।”

1300 साल पहले चाय थांग राजवंश के राजकुमारी वेनछेंग के साथ तिब्बत में लाया गया था। तिब्बती चाय का इतिहास भी इस तरह शुरू हुआ था। आज या-आन क्षेत्र के व्यापारियों ने तिब्बती चाय के अधिक बड़े बाजार में प्रवेश होने के लिए निरंतर प्रयास किया। उन की उम्मीद है कि तिब्बती चाय को तिब्बती पठार से दूसरे क्षेत्रों के आम आदमियों के मेज पर पहुंचाया जाए। या-आन शहर की मैत्री चाय कंपनी के बॉस गैन यू श्यांग ने अपने दल के साथ तिब्बती चाय का विस्तार करने के लिए सबसे पूर्व कोशिश की। उन्हों ने कहा, “हमारी योजना में तीन चरण शामिल हैं यानी कि सबसे प्रथम तिब्बती चाय को हान जातीय चाय बनाया जाएगा। पहले तिब्बती चाय सिर्फ तिब्बती पठार पर प्रसारित था, पर अगर दूसरे क्षेत्रों में यह भी बेचाया जाए, तो इस चाय का विशाल बाजार होगा। दूसरा, तिब्बती चाय को और श्रेष्ठ बनाया जाएगा। पहले का तिब्बती चाय की बनावट इतनी श्रेष्ठ नहीं थी। इसे और अच्छी तरह बनाया जाने के बाद पूरे देश के बाजार में प्रस्तुत किया जाएगा। तीसरा, तिब्बती चाय में सांस्कृतिक तत्व शामिल कराया जाएगा। हम जनता की सेवा करने के लिए चाय बनाते हैं। हम चाय बेचते समय इस की संस्कृति का प्रसार कर रहे हैं। प्राचीन काल में तिब्बती चाय का रूप ईंट के जैसे बनाया जाता था। आज हम इस चाय का आकार दूसरे किस्म के चाय के जैसे बनाते हैं।”

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