तिब्बत में कालीन बुनाई उद्योग का इतिहास

2019-01-07 08:32:00

तिब्बती कालीन उद्योग का इतिहास

चीनी विद्वान लू चिनशींग ने तिब्बती पठार पर गलीचा बनाने वाले स्थलों का दौरा किया। उन्हों ने अपने अनुसंधान के आधार पर प्रकाशित पुस्तक चीन में कालीन और कंबल बुनाई उद्योग का इतिहास में तिब्बती कालीन का खूब वर्णन किया है। इन के मुताबिक प्राचीन काल में ही तिब्बती पठार पर रहने वाले लोगों ने ऊन से बुनाई करने का काम करना शुरू किया था। तिब्बती पठार के उत्तर में स्थित गलमू क्षेत्र में पुरातत्व वैज्ञानिकों की खोज से यह पता लगाया गया है कि कई हजार साल पहले ही इस क्षेत्र में रहने वालों ने गलीचा बनाना शुरू किया था। लेकिन सातवीं शताब्दी के थांग राजवंश में ही चीन में कालीन बुनाई करने का उद्योग प्रचलित होने लगा था। उस समय तिब्बती पठार और चीन के भीतरी इलाकों के बीच सक्रिय आदान प्रदान चल रहा था और कालीन भी ऐसे आदान प्रदान का एक भाग बना था। प्राचीन काल से ही कुछ जातियां चीन के भीतरी इलाकों से तिब्बती पठार पर प्रवासन करने गयी थीं। थांग राजवंश के ग्रंथों में ऐसे प्रवासन का वर्णन भी किया गया था। विभिन्न जातियों के प्रवासन और सांस्कृतिक आदान प्रदान करने में कालीन या गलीचा का उत्पादन व प्रचार भी फैलने लगा था। विशेषज्ञों का मानना है कि आज चीन के तिब्बत और सिंच्यांग आदि क्षेत्रों में प्रचलित कंबल बनाने की कौशल वही प्रवासन का परीणाम है। पुरातत्व वैज्ञानिकों ने अपनी खोज से यह पता लगाया है कि कई हजार साल पहले उत्तरी चीन के सांस्कृतिक खंडहर में पता कुछ गुप्तचार संकेत या चित्र, आज के उत्तरी या पश्चिमी चीन के कालीन पर भी दिखता रहा है। आज तिब्बत और छींगहाई क्षेत्र में उत्पादित कालीन के चित्रों में फिर भी ऐसे संकेत या चित्र सुरक्षित हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि प्राचीन काल में लोग कालीन बनाने की कौशल के साथ तिब्बती पठार से सिंच्यांग क्षेत्र में जाते थे। आज सिंच्यांग और तिब्बत के बीच भी एक आधुनिक मार्ग प्रशस्त किया गया है। चरवाहे आज भी अपने पशुओं के साथ इन दो क्षेत्रों के बीच भ्रमण करते रहे हैं। इन दोनों क्षेत्रों में पुरातत्व वैज्ञानिकों ने सांस्कृतिक खंडहरों की खोज में कालीन चित्र का पता लगाया है। मिसाल के तौर पर तिब्बत के गू-ग राजवंश के खंडहर में आज भी 1100 साल पहले के भित्ति-चित्र संरक्षित हैं। जिसपर प्राचीन काल के कंबल का संकेत और चित्र भी दिखते हैं। उधर तिब्बत की राजधानी ल्हासा शहर में प्राचीन काल में कंबल बनाने का सबूत भी पता लगा है। सातवीं शताब्दी में तिब्बती राजा ने अपने आदेश में यह वर्णित किया था कि डाक्टर को मोटे मोटे कालीन पर बिठाया जाना चाहिये। इससे यह साबित किया गया है कि उसी समय तक तिब्बत में कालीन का व्यापक प्रयोग किया जा रहा था।

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