द-ग सूत्र मुद्रण गृह

2019-01-14 14:31:00

दक्षिण पश्चिमी चीन के सिचुआन प्रांत के गार्ज़े तिब्बती स्वायत्त प्रीफेक्चर की द-ग काउंटी में एक बहुत मशहूर छापाख़ाना है, जो प्रिंटिंग हाउस, प्रकाशन घर, पुस्तकालय, संग्रहालय और धार्मिक स्थान आदि सब की भूमिका अदा कर रहा है। जिसका नाम है द-ग सूत्र मुद्रण गृह और उसे राष्ट्र स्तरीय सांस्कृतिक अवशेष संरक्षण इकाई के रूप में निर्धारित किया गया है।

चीन के छींग राजवंश यानी सन 1729 में द-ग काउंटी के शासक ने द-ग सूत्र मुद्रण गृह की स्थापना की। इस का निर्माण करने में लगभग तीस साल का समय लगा था। इस तीन मंजिले वाली इमारत का निर्माण क्षेत्रफल दस हजार वर्ग मीटर तक जा पहुंचता है। इस छापाखाने में अभी तक तीन लाख से अधिक प्रिंटिंग प्लेट सुरक्षित हैं। छापाखाने में 830 से अधिक प्राचीन ग्रंथ या सूत्र संरक्षित हैं, जो बौद्ध ग्रंथ, दर्शन, खगोल विज्ञान, पंचांग, भूगोल, इतिहास, संगीत, ललित कला, दवा और शिल्प आदि के बारे में हैं। उनमें जो कुछ प्राचीन बौद्ध ग्रंथ हैं, वह सौ से अधिक कारीगर की कई सालों की कोशिशों के जरिये छापे गये थे। प्राचीन प्रिंटिंग प्लेट का संरक्षण करने के लिए आजकल ऐसे बौद्ध ग्रंथों की छपाई बहुत कम की जाती है। द-ग छापाख़ाने में प्रकाशित सूत्र आम तौर पर चीन के तिब्बती बहुल क्षेत्रों और दूसरे देशों व क्षेत्रों में बेचते हैं। इधर के तीन सौ सालों में द-ग छापाख़ाने ने पारंपरिक संस्कृति का उत्तराधिकार करने के लिए भारी योगदान पेश किया है। दसवें पंचन लामा ने सन 1986 में द-ग छापाख़ाने को "बर्फदार पर्वत के नीचे संस्कृति का खजाना" से शीर्षक किया। सन 1996 में इसे चीनी राष्ट्र स्तरीय सांस्कृतिक अवशेष संरक्षण इकाई की नामसूची में निर्धारित किया गया और सन 2009 में इसे संयुक्त राष्ट्र संघ की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में शामिल भी हुआ।

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