माउंट चोमोलंगमा का सदैव संरक्षण

2019-04-16 11:37:01

हिमालय पर्वत की रिज पर खड़े माउंट चोमोलंगमा, जिसका दूसरा नाम है माउंट एवरेस्ट, को विश्व में सबसे ऊँचा पहाड़ माना जाता है। और वह चीन और नेपाल के बीच की सीमा पर स्थित है। 8848 मीटर ऊंची यह चोटी अपने अद्भुत दृश्यों से विश्व भर के पर्वतारोहियों को आकर्षित है। लेकिन हर वर्ष हजारों पर्वतारोहियों और आम यात्रियों की कार्यवाहियों से इस पवित्र पहाड़ में गंभीर प्रदूषण पैदा किया गया है। माउंट चोमोलंगमा के प्राकृतिक संरक्षण क्षेत्र में छोड़े गये असंख्य कचरों से हमें यह पता रहा है कि माउंट चोमोलंगमा का अच्छी तरह संरक्षण करने की बड़ी आवश्यकता है।

हाल में तिब्बत स्वायत्त प्रदेश के शिगाज़े शहर की डिन्ग्री काउंटी ने माउंट चोमोलंगमा के प्राकृतिक संरक्षण क्षेत्र के प्रबंधन को सख्त बनाने के लिए सूचित किया और इस प्राकृतिक संरक्षण क्षेत्र के कुछ भागों को पर्यटकों के लिए बन्द किया। चीनी विज्ञान अकादमी के छींगहाई-तिब्बत पठार अनुसंधान संस्थान के विशेषज्ञ वांग जूंग यान ने कहा कि माउंट चोमोलंगमा क्षेत्र के संरक्षण को सख्त बनाने की बड़ी आवश्यकता है। अब पर्यटक 5100 मीटर ऊंचे रूंगभू मंदिर तक जा पहुंचते हैं, जहां वे आसानी से माउंट चोमोलंगमा का दर्शन कर सकते हैं, पर इस से ऊंचे के माउंट चोमोलंगमा के पर्वतारोहण शिविर तक नहीं जा सकते हैं। इस शिविर में कचरे प्रबंधन के कड़े नियम हैं। सभी कचरों को गाड़ियों से बाहर तक पहुंचाया जाना पड़ता है। लेकिन ज्यादा पर्यटकों के प्रवेश से इस क्षेत्र के प्राकृतिक वातावरण को अधिकाधिक दबाव का सामना करना पड़ता है। नये नियम के मुताबिक पर्यतक आम तौर पर रूंगभू मंदिर में वैज्ञानिक दर्शन आदि गतिविधियों में भाग ले सकते हैं। क्योंकि माउंट चोमोलंगमा के आसपास क्षेत्र में प्राकृतिक वातावरण बहुत नाजुक है, आदमी की गतिविधियों से पर्यावरण की वहन क्षमता कमजोर बनती जा रही है। अनियमित पर्वतारोहण की गतिविधियों को मना करना पड़ेगा।

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