बी एंड आर प्रस्ताव वैश्विक अर्थव्यवस्था अधिक ऊंचे स्तर पर बढ़ाएगा

2019-04-22 17:04:00

बी एंड आर प्रस्ताव वैश्विक अर्थव्यवस्था अधिक ऊंचे स्तर पर बढ़ाएगा

मशहूर रूसी राजनीतिज्ञ और अर्थशास्त्री बोरिस टिटोव ने हाल ही में सीआरआई के संवाददाता को दिये एक विशेष साक्षात्कार में बताया कि एक पट्टी एक मार्ग (बी एंड आर) प्रस्ताव वैश्विक अर्थव्यवस्था अधिक ऊंचे स्तर पर बढ़ाएगा । रूस को चीन के विकास के अनुभव की आवश्यकता है। रूस चीन के साथ सक्रियता से सहयोग चलाएगा।

दूसरा एक पट्टी एक मार्ग अंतरराष्ट्रीय सहयोग शिखर मंच 26 से 27 अप्रैल को पेइचिंग में आयोजित होगा। रूसी राष्ट्रपति पुतिन मुख्य अतिथि के रूप में इसमें भाग लेंगे ।टिटोव ने बताया कि इस शिखर मंच का आयोजन पूरे विश्व द्वारा एक पट्टी एक मार्ग प्रस्ताव की उपलब्धियां साझा करने का और एक सबूत होगा । उन्होंने बताया ,मेरे विचार में यह मंच फिर एक बार एक पट्टी एक मार्ग प्रस्ताव की सफलता साबित करेगा ,क्योंकि इस प्रस्ताव ने अधिक ऊंचे स्तर पर वैश्विक अर्थव्यवस्था के विकास को बढ़ावा दिया है। इस प्रस्ताव से साबित हुआ है कि चीन सिर्फ़ अपने आर्थिक विकास की सोच करता है, बल्कि वह विश्व भर में अपनी नज़रें बनाए रखते हुए विभिन्न देशों के बीच साझेदारी के आधार पर संयुक्त रूप से वाणिज्यिक और सरकारी सहयोग करना चाहता है ,जिससे अन्य देशों को अधिक पूंजी मिलेगी। वैश्विक दृष्टि से यह प्रस्ताव रूस समेत एक पट्टी एक मार्ग पर स्थित देशों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।

टिटोव ने बताया कि एक पट्टी एक मार्ग प्रस्ताव न सिर्फ मौका साझा करने और समान विकास को बढ़ाता है ,बल्कि आर्थिक व व्यापारिक सहयोग के जरिये मुश्किल अंतरराष्ट्रीय मुद्दों के समाधान में रोल मॉडल की भूमिका निभाता है ,उदाहरण के लिए अंतरराष्ट्रीय शरणार्थी सवाल ।उन्होंने बताया ,बड़ी संख्या में अंतरराष्ट्रीय शरणार्थियों का यूरोप में घुसने का मुख्य कारण यही है कि उनके गृह क्षेत्र का जीवन स्तर बहुत नीचा है । अब चीन उन क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था उन्नत कर रहा है ।एक पट्टी एक मार्ग प्रस्ताव का दायरा व्यापक है । उदाहरण के लिए चीन और केन्या ने मिलकर बंदरगाह का निर्माण किया, जिसने वहां बड़ी संख्या में रोज़गार के मौके पैदा किये ।इस तरह यूरोप जाने वाले केन्याई शरणार्थियों की संख्या में बड़ी कमी नज़र आयी है। अंतरराष्ट्रीय शरणार्थियों के सवाल के समाधान की प्राथमिकता है कि शरणार्थियों के स्रोत क्षेत्र में मौजूद जीवन और रोज़गार सवाल का समाधान करना है। चीन इस संदर्भ में कदम उठाने वाला पहला देश है।

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