असाधारण महिला ल्यू मैन छींग की कहानी

2019-05-20 09:02:00

असाधारण महिला ल्यू मैन छींग

हाल ही में चीन की राजधानी पेइचिंग में स्थित तिब्बती संस्कृति संग्रहालय में एक असाधारण महिला ल्यू मैन छींग की प्रदर्शनी हुई। जिससे बहुत से लोगों का ध्यान आकर्षित हुआ।

ल्यू मैन छींग, जिन का तिब्बती नाम था यूंगचीन, सन 1906 में ल्हासा शहर में जन्म हुई। ल्यू मैन छींग की मां एक तिब्बती औरत थी, इन के पिता जी ल्यू ह्वा श्वैन हान जातीय के थे, उन्होंने छींग राजवंश के तिब्बत स्थित मिनिस्टर के सचिव तथा 9वें पंचन लामा के दूत का पद सँभाला था। ल्यू मैन छींग का जीवन असाधारण भी था, उन्होंने ल्हासा, दार्जिलिंग और पेइचिंग में अध्ययन किया था और हान जातीय भाषा, तिब्बती भाषा और अंग्रेज़ी भाषा सब आती थी। सन 1929 में उन्होंने तत्कालीन चीनी सरकार की उच्च स्तरीय अफसर की हैसियत से ल्हासा की यात्रा की और सन 1930 में ल्हासा में 13वें दलाई लामा के साथ संपर्क किया। भीतरी इलाके में वापस लौटकर उन्होंने अपनी यात्रा के बारे में एक किताब लिखी।

ल्यू मैन छींग के पिता जी तिब्बत में स्थित छींग राजवंश के मिनिस्टर के सचिव और नौवें पंचेन लामा के सचिव की हैसियत से ल्हासा में रहते थे। अपने मां बाप के साथ ल्यू मैन छींग ने ल्हासा में अपना बचपन बिताया। सन 1911 में छींग राजवंश के भंग होने के बाद ल्हासा में हंगामा घटित हुआ। उन का घर भी दुर्भाग्य से जल गया था। इस के बाद सन 1915 में ल्यू मैन छींग अपने परिवार के साथ भारत के दार्जिलिंग चली गई। वहां उन्होंने एक भोजनालय का संचालन किया।12 साल की उम्र में वह अपने माता-पिता के साथ चीन के पेइचिंग शहर लौट आई। पेइचिंग में प्राइमरी स्कूल और मिडिल स्कूल में पढ़ने के बाद ल्यू मैन छींग ने एक अस्पताल में नर्सिंग का अध्ययन किया। क्योंकि उन के विचार में तिब्बत में चिकित्सा कार्य को बढ़ाने की जरूरत थी। 19 साल की उम्र में ल्यू मैन छींग ने पिता जी के आदेश से एक स्थानीय लड़के के साथ विवाह किया। लेकिन शादी होने के बाद इस दंपत्ति के बीच अक्सर झगड़ा हुई। अंततः ल्यू मैन छींग ने इस असुखमय शादी से त्याग दिया।

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