तिब्बती एयरलाइंस का 54 वर्षों के लिये सुरक्षित उड़ान भरने का रिकॉर्ड

2019-05-24 18:01:00

नये चीन की स्थापना के बाद स्थापित तिब्बती एयरलाइंस ने 54 वर्षों के लिए सुरक्षित उड़ान का रिकॉर्ड कायम किया है जहां की प्राकृतिक स्थितियां विश्व में सबसे ऊंची और मुश्लिक हैं।

तिब्बती पठार की औसत ऊँचाई चार हजार मीटर से ऊपर है। जहां के प्राकृतिक वातावरण में हिम पर्वत, ग्लेसियर, रेतीली हवा, ओले और भारी बरसात आदि से भरा हुआ है। इस क्षेत्र को विश्व में सबसे मुश्किल उड़ान क्षेत्र माना जाता है। सन 1956 के मई में चीनी वायु सेना ने ल्हासा के हवाई अड्डे पर प्रथम उड़ान शुरू किया और तिब्बत तक जाने वाला वायु मार्ग खोल दिया। इस के बाद के दस सालों के प्रयासों से सन 1965 में पेइचिंग-छंगतु-ल्हासा रूट औपचारिक तौर पर खोला गया। अभी तक तिब्बत में ल्हासा, छांगतु, न्यिंग-ची, न्गाली और शिगाज़े पाँच शहरों में हवाई अड्डों का निर्माण किया गया है।

चीनी नागरिक उड्डयन निगम के अधीन तिब्बत स्वायत्त प्रदेश प्रबंधन विभाग के रिटायर्ड तिब्बती कर्मचारी वूज़ीन ने दामशूंग हवाई अड्डे के निर्माण में भाग लिया था, अपनी आपबीती की याद करते हुए उन्होंने कहा,“दामशूंग क्षेत्र में हवाई अड्डे का निर्माण करना अत्यंत मुश्किल था। इस क्षेत्र की ऊँचाई अधिक है और जलवायु बहुत खराब है। सभी सामग्रियों का हाथ ट्रॉली के जरिये परिवहन करना पड़ता था। पर अपनी जन्मभूमि का निर्माण करने के लिए हम ने बहुत मेहनती से श्रम किया था।”

अंतरराष्ट्रीय नागरिक उड्डयन मानक के मुताबिक 2,438 मीटर से अधिक की ऊंचाई पर निर्मित हवाई अड्डे को पठारी हवाई अड्डा बताया जाता है। इस मानक के मुताबिक तिब्बत में निर्मित सभी हवाई अड्डों को सब उच्च पठार का हवाई अड्डा बताया जा सकता है। एयर चाइना की दक्षिण-पश्चिमी शाखा के कप्तान वांग यूंग ने कहा,“उच्च ऊंचाई के हवाई अड्डे पर विमान का प्रदर्शन भी घटेगा। चाहे वायुगतिकी या इंजन प्रदर्शन के घटने से विमान को उड़ान भरने में तनाव मिलेगा। इसके अलावा हवाई अड्डे के आसपास कई पहाड़ हैं जहां की स्थितियां अधिक जटिल हैं। पठार पर मौसम जटिल और विविध है और इससे उड़ान भरने पर भी प्रभाव पड़ता है।”

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