तिब्बती आली हवाई अड्डे पर कार्यरत युवक

2019-05-29 16:34:00

तिब्बत स्वायत्त प्रदेश के आली क्षेत्र की औसत ऊँचाई 4500 मीटर होती है। "विश्व की छत पर रिज" के इस क्षेत्र में निर्मित हवाई अड्डा दुनिया का चौथा सबसे ऊंचा एयरपोर्ट माना जाता है। आली हवाई अड्डे में कार्यरत कुछ युवकों ने असंख्य कठिनाइयों को दूर कर "अली ऑफ़ द स्काई" की रक्षा में काम किया है।

विमानन तिब्बत को बाहरी क्षेत्रों के साथ जोड़ने का एकमात्र तेज और कुशल रास्ता माना जाता है। आली क्षेत्र में अल्पाइन और हाइपोक्सिया की स्थितियां मौजूद हैं, जहां की चिकित्सीय सेवा भी खराब है। जब लोग अचानक बीमारी से ग्रस्त हुए, तब तो इन का समय पर उपचार करना भी मुश्किल है। वर्ष 2017 के जुलाई माह में आली क्षेत्र में हवाई अड्डे का निर्माण किया गया जिससे पुरानी स्थितियों में सुधार लाया गया है। शीघ्र और कुशल वायु परिवहन से कई व्यक्तियों की जान बचाया गया है। इसलिए आली हवाई अड्डे को भीतरी इलाकों के साथ जोड़ने की "जीवन रेखा" के रूप में सराहा गया है।

डेचेन वांगमो आली हवाई अड्डे के क्लीनिक में काम करने वाली डॉक्टर हैं। प्रति दिन जब विमान हवाई अड्डे पर उतरता है, तब वांगमो अपने सहपाठियों के साथ-साथ व्हीलचेयर को लेकर विमान रैंप के पास यात्रियों की अगवानी करते रहे हैं। ताकि उन यात्रियों, जो ऊंचाई की प्रतिक्रिया से ग्रस्त हैं, की सुरक्षा की रक्षा करें। वांगमो ने वर्ष 2011 में पूर्वी चीन के शीच्याच्वांग मेडिकल कॉलेज में स्नातक होने के बाद आली हवाई अड्डे में काम करना शुरू किया। अपनी कहानी सुनाते हुए उन्होंने कहा,“आली क्षेत्र में चिकित्सा की स्थिति बहुत लिमिट है। जब यातायात दुर्घटना से ग्रस्त व्यक्ति, या सेरेब्रल रक्तस्राव और रोधगलन के रोगी अचानक हुए, तो इन का शीघ्र ही अस्पताल में उपचार करने की बड़ी जरूरत है। इसी स्थिति में हम इन व्यक्तियों को विमान टीकेट खरीदने और चेक-इन आदि की सेवा में मदद प्रदान करते हैं। हम ने तिब्बती नागरिक उड्डयन प्राधिकरण के नेतृत्व में गंभीर रोगियों को बचाने के लिए यह हवाई जीवन रेखा स्थापित की है।”

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