इतिहास का सिंहावलोकन --- तिब्बत की ओर जन मुक्ति सेना का अभियान

2019-08-08 14:03:00

यह खबर मिलने के बाद बहुत से तिब्बती लोगों को यह पता लगा कि जन मुक्ति सेना के सैनिक अच्छे आदमी थे। उन्होंने मुक्ति सेना के लिए गाइडिंग किया, भोजन का परिवहन किया, मुक्ति सेना के घायल व बीमार सिपाहियों की देखभाल में काम किया और तिब्बती सैनिकों को आत्मसमर्पण की सलाह दी। छांगतु युद्ध की समाप्ति के बाद जन मुक्ति सेना ने तिब्बती युद्ध कैदियों को चांदी डॉलर और यहां तक घोड़े भी दिये ताकि वे अपनी जन्मभूमि वापस जा सके। उन्होंने आँखों में आँसू बहते हुए कहा कि वे प्रतिक्रियावादी सत्ता के लिए काम कभी नहीं करेंगे। छांगतु में आपे आवांजिन्मे आति स्थानीय तिब्बती नेताओं ने दलाई लामा और ल्हासा की स्थानीय सत्ता को पत्र भेजा और उन्हें मुक्ति सेना के साथ वार्ता करने की सलाह दी। बाद में उन्होंने केंद्र और तिब्बती स्थानीय सत्ता के बीच "17-अनुच्छेद समझौता" के हस्ताक्षरण के लिए भी भारी योगदान पेश किया। सन 1951 की 23 मई को केंद्र सरकार ने तिब्बती स्थानीय सत्ता के साथ तिब्बत की शांतिपूर्ण मुक्ति के उपायों पर केंद्रीय सरकार और तिब्बती स्थानीय सरकार के बीच समझौते (यानी कि "17-अनुच्छेद समझौता") पर हस्ताक्षर किये। जिससे तिब्बत की शांतिपूर्ण मुक्ति संपन्न हुई। चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के नेतृत्व में चीनी जन मुक्ति सेना ने तिब्बत की देशभक्त लोगों और सूत्रों की मदद में महान विजय जीत ली। इसके बाद तिब्बती स्थानीय सत्ता के नेताओं और भू-दास मालिकों ने विद्रोह किया। जन मुक्ति सेना ने चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की नीतियों के मुताबिक विद्रोहियों का दमन किया, साम्राज्यवादी ताकतों को खदेड़ दिया और भू-दास की व्यवस्थाओं को भंग किया। तिब्बत में भारी परिवर्तन आया और तिब्बती जनता इतिहास में प्रथम बार अपनी ज़मीन का मालिक बनी। और इधर के वर्षों के प्रयासों से तिब्बती जनता को सुखमय जीवन प्राप्त हो गया है। आज वे चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के नेतृत्व में समाजवादी तिब्बत के निर्माण के रास्ते पर आगे बढ़ रही है।

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