गरीबी उन्मूलन और फोटोवोल्टिक पावर स्टेशन

2019-08-12 09:02:00

छिंगहाई प्रांत के फोटोवोल्टिक पावर स्टेशन के निर्माण में हरित रंग के विकास को भी महत्व दिया जाता है। पंक्तियों में खड़े हुए फोटोवोल्टिक पैनलों के नीचे हरे रंग वाले घास उगने लगे हैं, जो जीवन की आशा को इंगित कर रहे हैं। फोटोवोल्टिक पावर स्टेशन के निर्माण के चलते इस विशाल बंजर भूमियों पर घास रोपण का परीक्षण भी किया गया है। रेतीली हवा के कारण फोटोवोल्टिक पैनलों को हर महीने पानी से साफ करना चाहिये। फोटोवोल्टिक पैनलों की सफाई में धोया गया पानी घास को सिंचित करता है, और पौधों की वृद्धि से मिट्टी और पानी को बनाए रखा जाता है। इस तरह फोटोवोल्टिक पैनलों के नीचे हरे पारिस्थितिक पार्क का निर्माण हो गया है। परीक्षण का यह निष्कर्ष है कि फोटोवोल्टिक पावर स्टेशन के निर्माण से इस क्षेत्र में हवा की गति में 50% की कमी हुई है और वाष्पीकरण क्षमता 30% तक घटित है। तथ्यों से यह साबित है कि फोटोवोल्टिक पावर स्टेशन के निर्माण से मरुस्थलीकरण पर अंकुश लगाने के लिए अनुकूल है। वनस्पति पावर स्टेशन के आसपास के वातावरण में सुधार करती है, और स्टेशन के संयंत्रों के नुकसान को भी कम किया गया है। वातावरण के संरक्षण के लिए निर्माताओं ने वनस्पति संरक्षण, घास बीज के रोपण और कचरे निपटान आदि का प्रबंधन भी किया है। नई ऊर्जा के विकास के चलते नयी सामग्रियों और तकनीकों का इस्तेमाल भी अच्छे से किया जा रहा है। 13वीं पंचवर्षीय योजना के दौरान छिंगहाई प्रांत के हाईशी और हाईनान दो नयी ऊर्जा आधार का निर्माण जोरों पर किया जा रहा है। जिन की उत्पादन क्षमता छह करोड़ किलोवाट तक जा पहुंचेगी। इस के साथ यूएचवी संचरण तकनीक के प्रयोग से छिंगहाई प्रांत से दूसरे क्षेत्रों तक बिजली की आपूर्ति आसानी से की जाएगी। जिससे बेल्ट एंड रोड के निर्माण तथा मध्य क्षेत्र में ऊर्जा आपूर्ति की गारंटी भी की जाएगी।

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