तिब्बती साहित्य का नया वसंत

2019-08-19 09:33:00

तिब्बत में लोकतांत्रिक रूपांतरण की 60वीं जयंती मनाते हुए यह बताये गये हैं कि तिब्बती साहित्य का भी उल्लेखनीय विकास भी हुआ है। पूर्व में साहित्य का विषय मुख्य रूप से धर्म की सेवा होता था। आज तिब्बती भाषा का साहित्य आम आदमियों के जीवन से जुड़ा हुआ है। भिन्न भिन्न युगों में तिब्बत के उत्कृष्ट रचनाएँ और लेखक उभरे हुए हैं, जिन्हों ने चीन के साहित्य को समृद्ध बनाने के लिए योगदान पेश कर दिया है।  

सन 1950 के दशक से तिब्बत में अनेक लेखकों ने चीनी हान भाषा और तिब्बती भाषा से अपनी साहित्य रचनाएँ बनाना शुरू की थी। उन्होंने अपनी साहित्य रचनाओं से तिब्बत का सामाजिक, आर्थिक और वैचारिक परिवर्तन का रिकॉर्ड किया। लेखकों ने अपने उपन्यासों में तिब्बत में शांतिपूर्ण मुक्ति के बाद हुए सामाजिक परिवर्तन को दर्शाते हुए नए तिब्बत के निर्माण में लोगों की बुलंद आकांक्षा और युवकों के प्रेम जीवन का वर्णन किया। लेखकों ने चीनी कम्युनिस्ट पार्टी और जन मुक्ति सेना के तिब्बती जनता के साथ घनिष्ठ संबंधों की प्रशंसा कर तिब्बत में आधुनिक साहित्य का नया अध्याय जोड़ दिया। सन 1980 के दशक में स्थानीय लेखकों द्वारा तिब्बती भाषा से लिखित उपन्यास देश भर में ध्यानाकर्षक बने। तिब्बती लेखक येशिथेंज़िन द्वारा लिखित उपन्यास को चीन में प्रथम अल्पसंख्यक जातीय साहित्य पुरस्कार सौंपा गया। इस काल में तिब्बती साहित्य की सबसे बड़ी विशेषता यही है कि स्थानीय लेखक साहित्य सृजन के अग्रिम मोर्चे पर उभरे हुए हैं। उन्होंने बड़ी मात्रा की उत्कृष्ट और प्रभावशाली साहित्य रचनाएँ रचित की हैं। उन में "फ़िरोज़ा" और "कल का मौसम आज से बेहतर होगा" को तिब्बत स्वायत्त प्रदेश तथा चीनी राष्ट्रीय साहित्य पुरस्कार भी अर्पित किया गया था। उनके उपन्यासों में पुराने काल के अंधेरे, भू-दासों के दुखद जीवन तथा शांतिपूर्ण मुक्ति के बाद तिब्बती किसानों की सुखमय जीवन के प्रति उम्मीदों का वर्णन किया गया। इन उपन्यासों ने यथार्थवादी ढ़ंग से राजनीतिक जीवन में हुए परिवर्तनों का वर्णन किया और तिब्बती साहित्य की अनूठी शैली दिखाने में सफल किया।

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