सीमावर्ती गांव में तिब्बती मुखिया

2019-08-28 20:03:00

चीन के तिब्बत स्वायत्त प्रदेश और नेपाल के बीच कई हजार किलोमीटर लम्बी सीमा चलती है। जहां की ऊँचाई आम तौर पर चार हजार मीटर होती है और पहाड़ों के बीच मार्ग भी उबड़ खाबड़ है। तिब्बत के शिगात्ज़े शहर की चीलूंग काउंटी में स्थित शा गांव इन सीमावर्ती गांवों में से एक है।

शा गांव के मुखिया क्वेइसांग ने वर्ष 1983 से अपने दल को लेकर इस 40 किलोमीटर लम्बी सीमाओं पर गश्त करने की जिम्मेदारी उठायी है। दीर्घकाल तक गश्त करने वाले अनुभव से वे स्टोववे का समय और मार्ग जानते हैं। क्वेइसांग ने कहा कि स्टोववे को रोकने के लिए हम ने स्टेशन रख दिया है और स्टेशन में ड्यूटी करने वाले व्यक्ति गांव के साथ साथ स्टोववे के खिलाफ कदम उठाएंगे। क्वेइसांग ने गश्त करते समय अवैध तौर पर सीमा पार करने के कई व्यक्तियों और एक मोटर गाड़ी को रोक दिया है। मिसाल के तौर पर वर्ष 2015 के एक दिन जब क्वेइसांग ने सीमा पर गश्त किया तब तीन व्यक्ति नेपाल से चीन की सीमा को पार आये। क्वेइसांग ने तुरंत ही इन व्यक्तियों और इन के पास तस्करी की वस्तुओं को बर्खास्त किया।

पहाड़ों में गश्त करना कोई आसान काम नहीं है। गश्त करते समय बहुत सी कठिनाइयों का सामना किया जाना पड़ता है। और पहाड़ों में अकसर जंगलात पशुओं से भी मिलते हैं। एक दिन पहाड़ में गश्त करते समय क्वेइसांग के सामने अचानक एक भालू आया। भालू के प्रहार से बचने के लिए क्वेइसांग खड्ड में गिर गये और फ्रैक्चर हुए। लेकिन क्वेइसांग ने कठिनाइयों और खतरों के सामने घुटने टेक नहीं दिये। और पत्नी ने भी उन के काम का भरपूर समर्थन किया। क्वेइसांग ने वर्ष 1978 में गांव मुनीब का काम करना शुरू किया। वर्ष 2008 में उन्हें गांव में मुखिया निर्वाचित किया गया। उन्होंने बताया कि गांव में पहले बिजली और पेयजल की आपूर्ति नहीं हुई थी। बाहर जाने का मार्ग भी निर्मित नहीं था। गांववासियों को याक के सहारे चावल, चाय और घी आदि चीज़ें खरीदनी पड़ती थी। आज पार्टी व सरकार की सहायता में गांव में बिजली, जल और यातायात सब की सुविधाएं तैयार हो चुकी हैं। और बहुत से परिवारों का अपना नया मकान निर्मित हो गया है। वर्ष 2015 की 25 अप्रैल को नेपाल में 8.1 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप आया। भूकंप के केंद्र से नजदीक होने के कारण तिब्बत के शा गांव में भी हिमस्खलन हुआ। क्वेइसांग ने अपने सहपाठियों के साथ साथ ढह गए मकानों में से आदमी और संपत्तियों का बचाव करने की भरसक कोशिश की, और मिलिशियाओं को मैदानों पर टेंट स्थापित करवाया ताकि गांववासियों का स्थानांतरण कर सके। भूकंप के बाद क्वेइसांग ने सरकार की सहायता में गांव के लोगों के साथ-साथ सड़कों और नहरों आदि बुनियादी सुविधाओं का पुनर्निर्माण शुरू किया। और यहां तक कि उन्होंने अपनी कृषि योग्य भूमि को दान में देकर गांव की समिति भवन का निर्माण करवाया।

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